नमस्कार साथियों! मैं आपका सीनियर टेक्नीशियन (ग्रेड-1), वर्कशॉप और सिकलाइन के अपने बरसों के अनुभव के साथ आज एक बहुत ही ज़रूरी टॉपिक लेकर आया हूँ। अगर आप LDCE या GDCE जैसी विभागीय परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो ‘Condemnation Report in Railway’ (कबाड़ घोषित करने की रिपोर्ट) के सवाल आपको पेपर में हर हाल में मिलेंगे।
रेलवे में जब कोई वैगन, कोच या लोकोमोटिव अपनी उम्र पूरी कर लेता है, तो उसे ट्रैक से हमेशा के लिए हटाना बहुत ज़रूरी होता है। इसी पूरी प्रक्रिया को हमारी तकनीकी भाषा में कंडमिनेशन (Condemnation) कहा जाता है।
ड्यूटी के दौरान आपने अक्सर यार्ड में ऐसे खस्ताहाल डिब्बे देखे होंगे जिन पर सफेद पेंट से बड़ा-बड़ा ‘COND’ लिखा होता है। एक बार यह रिपोर्ट बन गई, तो वह डिब्बा दोबारा कभी पैसेंजर या गुड्स ट्रेन में नहीं जोड़ा जा सकता है।
हम जैसे ग्रेड-1 टेक्नीशियन जो सालों से ईस्ट सेंट्रल रेलवे (ECR) और अन्य ज़ोन में पसीना बहा रहे हैं, उन्हें पता है कि इस रिपोर्ट को बनाने में कितनी बारीकी चाहिए। आज मैं आपको किताबों से निकलकर सीधे ग्राउंड लेवल की वह जानकारी दूँगा, जो आपको रेलवे की किसी आम गाइड में नहीं मिलेगी।
एक नज़र में तकनीकी जानकारी (Quick Specs / Exam Facts)
विभागीय परीक्षा में कोडल लाइफ और पावर ऑफ अथॉरिटी से जुड़े सीधे सवाल पूछे जाते हैं। नीचे दी गई टेबल को एकदम रट लीजिए क्योंकि यह आपके ऑब्जेक्टिव सवालों में बहुत काम आएगी।
| रोलिंग स्टॉक का प्रकार | निर्धारित कोडल लाइफ (Codal Life) | ओवर-एज कंडमिनेशन अथॉरिटी (SOP के अनुसार) |
| ICF कोच (पैसेंजर) | 25 वर्ष | CWM / CRSE / PCME (बिना फाइनेंस कंकरेंस) |
| LHB कोच | 35 वर्ष | CWM / CRSE / PCME |
| BOXN वैगन (ओपन) | 30 वर्ष | CWM / CRSE / PCME |
| TANK वैगन (BTPN) | 45 वर्ष | CWM / CRSE / PCME |
| अंडर-एज वैगन (< 25 साल) | दुर्घटना या डैमेज के कारण | रेलवे बोर्ड (GM और PFA की मंजूरी के साथ) |
| BVZC (4-व्हीलर ब्रेक वैन) | बोर्ड लेटर 2015/M(N)/60/7 | CWM (एसोसिएट फाइनेंस की मंजूरी के साथ) |
रेलवे सुरक्षा में इसकी असली अहमियत क्या है? (Workshop/Track Importance)
एक बात हमेशा याद रखें, भारतीय रेलवे में मुसाफिरों और माल की सुरक्षा से बढ़कर दूसरा कोई नियम नहीं है। एक ओवरएज या बुरी तरह डैमेज हो चुका वैगन ट्रैक पर चलने का सीधा मतलब है डिरेलमेंट (Derailment) को खुला निमंत्रण देना।
जब किसी रोलिंग स्टॉक का अंडरफ्रेम (Underframe) बुरी तरह जंग खा जाता है (Corrosion), तो उसकी लोड सहने की ताकत बिल्कुल खत्म हो जाती है। ऐसी हालत में अगर कंडमिनेशन रिपोर्ट समय पर पास न हो, तो रनिंग ट्रेन में कपलिंग टूटने या एक्सेल जाम होने जैसी भयंकर दुर्घटनाएं हो सकती हैं।
पुराने हो चुके डिब्बों के ब्रेक गियर (Brake Gear) और बफर (Buffers) अपनी सही डायमेंशन खो देते हैं। अगर इनको समय रहते स्क्रैप नहीं किया गया, तो ट्रेन में जर्क (Jerk) लगेगा और पीछे वाले डिब्बे पटरी से उतर सकते हैं।
सुरक्षा के नज़रिए से ही रेलवे बोर्ड ने हर स्टॉक की एक एक्सपायरी डेट तय की है। इसे ही हम टेक्निकल भाषा में कोडल लाइफ कहते हैं, जिसके पूरा होने के बाद स्टॉक को पटरियों से हटाना हमारी सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी होती है।
RDSO के नियम और काम करने का सिद्धांत (RDSO Rules & Working Principle)

रेलवे बोर्ड और RDSO Manuals के कड़े दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी भी रोलिंग स्टॉक को कबाड़ (Scrap) घोषित करने के दो ही मुख्य आधार होते हैं। पहला, जब स्टॉक अपनी निर्धारित ‘Codal Life’ पूरी कर चुका हो, और दूसरा जब किसी भारी दुर्घटना के कारण उसकी मरम्मत करना आर्थिक रूप से संभव ही न हो (Uneconomical to repair)।
आजकल वैगन का पूरा कंडमिनेशन प्रोसेस डिजिटल हो गया है और यह सारा काम IRWMS (Indian Railway Web Management System) पोर्टल पर ऑनलाइन होता है। इसमें 13-पॉइंट की एक बहुत ही सख्त कंडीशन रिपोर्ट तैयार की जाती है जिसमें डिब्बे के चप्पे-चप्पे की जाँच होती है।
इस रिपोर्ट में अंडरफ्रेम, बोगी, बफर, ड्रा गियर, ब्रेक गियर और छत (Roof) की मौजूदा हालत को कागज़ पर दर्ज किया जाता है। अगर वैगन 25 साल से कम उम्र का है (Under-age), तो उसे कंडम करने के लिए सीधे रेलवे बोर्ड और PCME की विशेष अनुमति लेनी पड़ती है, जो कि एक लंबी प्रक्रिया है।
नियमों के अनुसार, सर्वे कमेटी (Survey Committee) यह तय करती है कि स्क्रैप में जाने से पहले डिब्बे से कौन से काम के पार्ट्स निकाले जा सकते हैं। इस कमेटी की रिपोर्ट के बिना कोई भी डिब्बा ऑक्शन (नीलामी) के लिए स्क्रैप डिपो में नहीं भेजा जा सकता है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण नोट्स (Copy-Paste Revision Notes)
Plaintext
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RAILWAY LDCE/GDCE EXAM NOTES: CONDEMNATION
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1. Condemnation का मुख्य कारण:
- Codal Life (निर्धारित आयु) पूरी होना।
- Accident के कारण Irreparable/Uneconomical डैमेज होना।
2. Codal Life (वर्षों में):
- LHB Coaches: 35 Years
- ICF Coaches: 25 Years
- BOXN / Open Wagons: 30 Years
- Tank Wagons (BTPN): 45 Years
3. Authority to Condemn (Overage Stock):
- CWM / CRSE / CWE / PCME (बिना फाइनेंस कंकरेंस के)।
4. Authority to Condemn (Underage Stock):
- Non-Accident (< 25 years): Railway Board (GM और PFA अप्रूवल के साथ)।
- Accident Involved: PCME (बिना फाइनेंस कंकरेंस के)।
5. Condemnation Report के मुख्य 13 पॉइंट्स (IRWMS):
1. Under Frame 2. Under Frame Fittings 3. Bogie Trucks
4. Buffers 5. Draw Gear 6. Brake Gear
7. Wheels & Axle 8. Bearing Springs 9. Body Frame
10. Body Fittings 11. Roof 12. Floor
13. Additional Particulars.
6. BVZC (4-Wheeler) Wagon Rule:
- RBE No: 2015/M(N)/60/7 के तहत CWM को कंडम करने का पावर दिया गया है।
7. Interception Certificate:
- कंडम होने वाले वैगन को IRWMS पोर्टल पर 'Interception for Condemnation' में डाला जाता है।
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खराबी और मेंटेनेंस का सही तरीका (Troubleshooting & Maintenance Process)

जब भी यार्ड में कोई वैगन POH (Periodic Overhauling) या ROH (Routine Overhauling) के लिए ड्यू होता है, तो सबसे पहले हमारी टीम उसकी मैन्युफैक्चरिंग डेट (Built Date) चेक करती है। अगर वह वैगन अपनी उम्र पूरी कर चुका है, तो उसे POH के लिए वर्कशॉप भेजने के बजाय सीधे सिकलाइन में ‘Interception’ के लिए खड़ा कर दिया जाता है।
हम लोग सबसे पहले वैगन के दोनों तरफ सफेद या लाल पेंट से एक बड़ा ‘COND’ मार्क कर देते हैं ताकि शंटिंग मास्टर गलती से भी इसे किसी मालगाड़ी में न जोड़ दे। इसके बाद सिकलाइन का SSE (C&W) और ADME मिलकर उस वैगन की एक विस्तृत 13-पॉइंट कंडीशन रिपोर्ट तैयार करते हैं।
इस रिपोर्ट में सबसे ज़्यादा ध्यान अंडरफ्रेम (Underframe) और सोल बार (Sole Bar) की थिकनेस पर दिया जाता है। अगर इन हिस्सों में जंग (Rust) लगने के कारण मेटल आधा रह गया है, तो वैगन को आगे चलाने का कोई सवाल ही नहीं उठता।
कंडम करते समय हम कुछ बहुत ही उपयोगी और महँगे फिटिंग्स (Excluded fittings to be retained) जैसे कि व्हील सेट (Wheel Set) और रोलर बेयरिंग (Roller Bearing Set) डिब्बे से सावधानीपूर्वक निकाल लेते हैं। ये पार्ट हमारे स्टोर में जमा हो जाते हैं और दूसरे वैगनों के मेंटेनेंस में काम आते हैं, जिससे रेलवे के लाखों रुपये बचते हैं।
रेलवे विभागीय परीक्षा और प्रैक्टिकल नोट्स की ऐसी ही अन्य जानकारी के लिए Sarkari Resultine पर विज़िट करें। इसके बाद बचे हुए ढाँचे को सेल (Sale) या ऑक्शन के लिए स्क्रैप डिपो को सौंप दिया जाता है।
सीनियर उस्ताद के सीक्रेट टिप्स (Senior Technician’s Secret Tips)
वर्कशॉप के उस्ताद होने के नाते मैं आपको एक ऐसा सीक्रेट बताता हूँ, जो आपको IRCA Rule Books में नहीं बल्कि पटरियों पर हथौड़ा चलाकर ही सीखने को मिलता है। जब भी आप यार्ड में किसी पुराने BVZC या BOXN वैगन को चेक करें, तो सबसे पहले उसके हेड स्टॉक (Head Stock) पर अपना टेस्टिंग हैमर ज़ोर से मार कर देखें।
अगर हथौड़े की आवाज़ एकदम खोखली (Hollow sound) आ रही है, तो समझ जाइए कि अंदर से लोहा पानी और नमी की वजह से गल चुका है। ऐसे डिब्बे को भूलकर भी पास मत कीजिए, यह डिब्बा कंडम होने के लिए पूरी तरह तैयार है।
ड्यूटी के दौरान एक और सावधानी यह रखें कि कंडम वैगन का ड्रा-गियर (Draw Gear) अंदर से बहुत कमज़ोर हो चुका होता है। शंटिंग के वक्त अगर इंजन ने हल्का सा भी झटका दिया, तो यह ड्रा-गियर बीच से टूट सकता है और बड़ा हादसा हो सकता है।
इसलिए जब भी ऐसे ओवरएज वैगन की शंटिंग यार्ड में हो, तो लोको पायलट और शंटमैन को साफ हिदायत दें कि स्पीड 2 से 3 Kmph से ज्यादा बिल्कुल नहीं होनी चाहिए। एक समझदार टेक्नीशियन हमेशा कागज़ों के साथ-साथ अपनी आँखों और कानों पर सबसे ज्यादा भरोसा करता है।
विभागीय परीक्षा और वाइवा के 3 सबसे ज़रूरी सवाल (Top 3 Viva/Interview FAQs)
सवाल 1: अंडर-एज (Under-age) वैगन को बिना एक्सीडेंट के कंडम करने की पावर किसके पास होती है?
जवाब: विभागीय परीक्षा में यह सवाल पक्का आता है, इसे ध्यान से समझ लें। अगर वैगन की उम्र 25 साल से कम है और वह दुर्घटनाग्रस्त नहीं है, तो उसे कंडम करने की फुल अथॉरिटी सिर्फ रेलवे बोर्ड के पास होती है, जिसके लिए GM का अप्रूवल और PFA का कंकरेंस ज़रूरी होता है।
सवाल 2: IRWMS पोर्टल पर ‘Interception Certificate’ का कंडमिनेशन में क्या रोल है?
जवाब: जब किसी वैगन को कंडम करने के लिए रोका जाता है, तो सबसे पहले IRWMS पोर्टल पर उसका ‘Interception Certificate’ जनरेट किया जाता है। इसके बिना आप आगे की कंडीशन रिपोर्ट और फाइनेंस अप्रूवल की प्रक्रिया शुरू ही नहीं कर सकते हैं।
सवाल 3: कंडमिनेशन रिपोर्ट के दौरान वैगन से कौन से पार्ट्स बचा (Retain) लिए जाते हैं?
जवाब: ऑक्शन में भेजने से पहले हम वैगन से अच्छे व्हील सेट, CTRB (Cartridge Taper Roller Bearing), और सीबीसी (CBC) के सही सलामत पार्ट्स निकाल लेते हैं। इन पार्ट्स को डिपो में स्टोर कर लिया जाता है ताकि सिकलाइन में आने वाले दूसरे रनिंग वैगनों में इनका दोबारा इस्तेमाल किया जा सके।
चलते-चलते बस इतना ही कहूँगा कि रेलवे का काम पूरी तरह से प्रैक्टिकल नॉलेज पर टिका है। रूल्स को रटने के साथ-साथ वर्कशॉप में हाथ काले करना भी सीखें, तभी आप एक बेहतरीन रेलकर्मी बन पाएंगे!
