रेलवे में हेल्पर या खलासी से Technician Grade-3 बनने का सपना हर जूनियर कर्मचारी का होता है। इसके लिए आपको LDCE या विभागीय प्रमोशनल कोटे के तहत होने वाले ‘ट्रेड टेस्ट’ (Trade Test) को पास करना बहुत ज़रूरी होता है।

इस टेस्ट में अफसर यह देखते हैं कि आपने सिकलाइन (Sickline) या वर्कशॉप में उस्तादों के साथ रहकर कितना प्रैक्टिकल काम सीखा है। अगर आप C&W (Carriage and Wagon) फिटर के लिए टेस्ट दे रहे हैं, तो सिर्फ किताबी ज्ञान से आपकी नैया पार नहीं लगेगी।

विभागीय परीक्षा में अधिकारी आपको सीधे जॉब (Job) थमा देते हैं और टूल्स का सही इस्तेमाल करने को कहते हैं। यहाँ आपकी मार्किंग आपके काम करने के तरीके, सुरक्षा नियमों के पालन और औजारों की समझ पर होती है।

अगर आप फिटर ट्रेड से हैं, तो आपसे लोहे को काटना, फाइलिंग करना, या थ्रेडिंग (Threading) जैसे बेसिक काम करवाए जा सकते हैं। इसके अलावा एयर ब्रेक सिस्टम और बोगी के पार्ट्स की पहचान करना भी इस टेस्ट का मुख्य हिस्सा होता है।

नए लड़कों को लगता है कि सिर्फ थ्योरी रट लेने से प्रमोशन मिल जाएगा, लेकिन असल वर्कशॉप में ऐसा बिल्कुल नहीं होता। ट्रेड टेस्ट में आपकी हाथों की सफाई (Hands-on Skills) और टेक्निकल समझ ही आपको पास करवाती है।

Quick Specs / Exam Facts (एक नज़र में तकनीकी जानकारी)

परीक्षा का नियम / पैरामीटरतकनीकी जानकारी और वेटेज
रेलवे बोर्ड सर्कुलरRBE No. 68/2025 और Master Circular No. 43
प्रैक्टिकल टेस्ट (Practical)कुल 60 Marks (पासिंग मार्क्स: 36)
मौखिक परीक्षा (Oral/Viva)कुल 40 Marks (पासिंग मार्क्स: 15)
SC/ST पासिंग मार्क्सप्रैक्टिकल में 30, ओरल में 11
मुख्य टूल्स (Fitter Tools)वर्नियर कैलिपर, माइक्रोमीटर, फीलर गेज, टैप एंड डाई
एयर ब्रेक प्रेशर (LHB/ICF)BP: 5.0 kg/cm2, FP: 6.0 kg/cm2
लीकेज टेस्ट लिमिट0.2 kg/cm2 प्रति मिनट से ज्यादा नहीं
चक्के का गेज (Wheel Gauge)1600 mm (+2 mm / -1 mm)

Workshop/Track Importance (रेलवे सुरक्षा में इसकी असली अहमियत क्या है?)

C&W फिटर को भारतीय रेलवे का सबसे महत्वपूर्ण सिपाही माना जाता है, जिस पर पूरी ट्रेन की सुरक्षा टिकी होती है। अगर आपने बोगी (Bogie) का एक भी नट-बोल्ट ढीला छोड़ दिया या स्प्लिट पिन नहीं लगाई, तो बड़ा डिरेलमेंट हो सकता है।

पिट लाइन (Pit line) और सिकलाइन में काम करते समय फिटर की पैनी नज़र ही चक्के या अंडरगियर (Undergear) की खराबी को पकड़ती है। इसलिए ट्रेड टेस्ट में अधिकारी आपकी इसी सतर्कता और सेफ्टी नियमों के प्रति आपकी जानकारी को परखते हैं।

जब आप ब्रेक ब्लॉक बदलते हैं या डैशपॉट (Dashpot) में तेल चेक करते हैं, तो यह सीधे तौर पर यात्रियों की जान से जुड़ा होता है। एक छोटी सी लापरवाही, जैसे ब्रेक सिलेंडर का प्रेशर सही ना होना, पूरी ट्रेन के ब्रेक सिस्टम को फेल कर सकती है।

यही कारण है कि अफसर ट्रेड टेस्ट के दौरान यह देखना चाहते हैं कि आप काम को लेकर कितने कॉन्फिडेंट और गंभीर हैं। अगर आप किसी खराब पार्ट को सही समय पर पहचान कर उसे रिजेक्ट कर देते हैं, तो यह एक अच्छे फिटर की सबसे बड़ी पहचान है।

 Technician Grade 3 Trade Test C&W Fitter checking wheel profile

RDSO Rules & Working Principle (RDSO के नियम और काम करने का सिद्धांत)

रेलवे में किसी भी पार्ट की मेंटेनेंस या चेकिंग हमेशा RDSO (Research Designs and Standards Organisation) के तय किए गए मैनुअल के हिसाब से होती है। आपको इन स्टैंडर्ड डायमेंशन और टॉलरेंस लिमिट्स की पक्की जानकारी होनी ही चाहिए।

उदाहरण के लिए, अगर आपको बफर हाइट नापने को कहा जाए, तो आपको पता होना चाहिए कि इसकी अधिकतम ऊंचाई 1105 mm और न्यूनतम 1030 mm होती है। इससे कम या ज्यादा होने पर कोच को अनफिट माना जाता है और उसे सिकलाइन में भेजा जाता है।

(रेलवे के आधिकारिक दिशा-निर्देशों के लिए आप Indian Railways RDSO Portal पर भी जानकारी देख सकते हैं)।

चक्के का व्यास (Wheel Diameter) भी एक बहुत ही गंभीर विषय है, जिसके लिए अलग-अलग कोच के अलग नियम होते हैं। LHB कोच में नए चक्के का व्यास 915 mm होता है, जबकि इसे अधिकतम 845 mm तक घिसने के बाद बदल दिया जाता है।

एयर ब्रेक सिस्टम में काम करने का सिद्धांत पूरी तरह से प्रेशर ड्रॉप (Pressure Drop) पर आधारित होता है। जब लोको पायलट ब्रेक पाइप (BP) का प्रेशर 5.0 kg/cm2 से गिराता है, तो DV (Distributor Valve) एक्टिव होकर ब्रेक लगा देता है।

अफसर यह भी पूछ सकते हैं कि POH (Periodic Overhauling) और ROH (Routine Overhauling) में क्या फर्क है। आपको पता होना चाहिए कि LHB कोच का SS-1 (Shop Schedule 1) 1.5 साल या 6 लाख किलोमीटर (जो भी पहले हो) पर होता है।

ट्रेड टेस्ट में आपको गेज (Gauge) का सही इस्तेमाल करना आना चाहिए, जैसे फीलर गेज से दो पार्ट्स के बीच का क्लीयरेंस नापना। बिना RDSO नियमों को जाने आप कभी भी एक परमानेंट फिटर के तौर पर रेलवे में टिक नहीं सकते।

Copy-Paste Revision Notes for Technician Grade 3 Trade Test Practical Guide (परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण नोट्स)

रेलवे विभागीय परीक्षा और प्रैक्टिकल नोट्स की ऐसी ही अन्य जानकारी के लिए Sarkari Resultine पर विज़िट करें। नीचे दिए गए नोट्स को कॉपी करके अपने मोबाइल में सेव कर लें ताकि परीक्षा से पहले आप तुरंत रिवीजन कर सकें।

=========================================
TECHNICIAN GR-3 (C&W FITTER) QUICK REVISION
=========================================

1. महत्वपूर्ण प्रेशर लिमिट्स (Air Brake):
- BP (Brake Pipe) प्रेशर: 5.0 kg/cm2 (हरे रंग का पाइप)
- FP (Feed Pipe) प्रेशर: 6.0 kg/cm2 (सफेद रंग का पाइप)
- ब्रेक सिलेंडर (BC) प्रेशर: 3.8 kg/cm2 (अधिकतम)
- CR (Control Reservoir) प्रेशर: 5.0 kg/cm2

2. चक्के के डायमेंशन (Wheel Dimensions):
- LHB कोच का नया व्हील: 915 mm | कंडेम (Condemn) साइज: 845 mm
- ICF कोच का नया व्हील: 915 mm | कंडेम साइज: 825 mm
- BOXN वैगन का नया व्हील: 1000 mm | कंडेम साइज: 906 mm
- व्हील गेज (Wheel Gauge) की स्टैंडर्ड दूरी: 1600 mm (+2/-1 mm)

3. बफर और कप्लर (Buffer & Coupler):
- LHB में इस्तेमाल होने वाला कप्लर: H-Type CBC (Tight Lock)
- ICF कोच की अधिकतम बफर हाइट: 1105 mm (खाली हालत में)
- ICF कोच की न्यूनतम बफर हाइट: 1030 mm (भरी हालत में)
- CBC कप्लर की ऊँचाई: 1105 mm (Max), 1030 mm (Min)

4. मेंटेनेंस शेडयूल (Maintenance Schedules):
- LHB SS-1: 18 महीने या 6 लाख किमी
- LHB SS-2: 36 महीने या 12 लाख किमी
- LHB SS-3 (POH): 72 महीने या 24 लाख किमी
- ICF POH: 18 महीने पर
- ICF IOH (ROH): 9 महीने पर

5. ट्रेड टेस्ट के लिए ज़रूरी टूल्स (Fitter Tools):
- वर्नियर कैलिपर (Vernier Caliper): बाहरी, भीतरी और गहराई नापने के लिए।
- माइक्रोमीटर (Micrometer): बहुत ही बारीक मोटाई नापने के लिए (Least count 0.01 mm).
- फीलर गेज (Feeler Gauge): दो सतहों के बीच का गैप/क्लीयरेंस नापने के लिए।
- थ्रेड पिच गेज (Thread Pitch Gauge): नट-बोल्ट की चूड़ियों (Threads) की पिच चेक करने के लिए।
=========================================

Troubleshooting & Maintenance (खराबी और मेंटेनेंस का सही तरीका)

ट्रेड टेस्ट में प्रैक्टिकल के दौरान अफसर आपको एक लोहे का टुकड़ा (MS Flat) दे सकते हैं और उसे 90 डिग्री के एंगल पर फाइल (File) करने को कह सकते हैं। यहाँ आपको यह साबित करना होता है कि आप ट्राई स्क्वायर (Try Square) का इस्तेमाल करके एकदम सीधा सरफेस बना सकते हैं।

इसके बाद आपसे उस लोहे के टुकड़े में ड्रिल (Drill) करके टैप (Tap) के जरिए अंदरूनी चूड़ियाँ (Internal threads) बनाने को कहा जा सकता है। यह काम करते समय सही साइज के ड्रिल बिट का चुनाव और कटिंग ऑइल (Cutting oil) का इस्तेमाल करना बहुत ज़रूरी होता है।

एक और आम प्रैक्टिकल टास्क है बोगी के सस्पेंशन की चेकिंग करना और खराबी पकड़ना। अफसर आपको एक पुरानी स्प्रिंग या शॉक एब्जॉर्बर दिखा कर पूछ सकते हैं कि इसे गाड़ी में लगाना चाहिए या रिजेक्ट कर देना चाहिए।

अगर आप एयर ब्रेक सेक्शन में हैं, तो आपसे DV (Distributor Valve) को आइसोलेट (Isolate) करने का तरीका पूछा जा सकता है। इसके लिए आपको आइसोलेटिंग हैंडल को ऊपर की तरफ करके रिलीज वॉल्व (Release Valve) का तार खींचना होता है, जिससे CR का प्रेशर निकल जाए।

वर्नियर कैलिपर (Vernier Caliper) से रीडिंग लेना फिटर ट्रेड का सबसे बेसिक और सबसे ज़रूरी काम है। आपको इसे जीरो (Zero) पर सेट करना और मेन स्केल व वर्नियर स्केल की लाइनें मिलाकर सटीक रीडिंग निकालना आना चाहिए।

ट्रबलशूटिंग के दौरान अगर गाड़ी में ब्रेक बाइंडिंग (Brake Binding) हो गई है, तो आपको सबसे पहले DV चेक करना होता है। ब्रेक सिलेंडर का प्रेशर पूरी तरह रिलीज न होने पर भी ब्रेक ब्लॉक चक्के से चिपके रहते हैं, जिससे चक्का गर्म होकर चटक सकता है।

सिकलाइन में काम करते समय SAB (Slack Adjuster) का एडजस्टमेंट (A-Dimension और E-Dimension) सेट करना भी एक अहम काम है। ट्रेड टेस्ट में अक्सर अफसर आपसे यह ‘ए-डायमेंशन’ की वैल्यू पूछ लेते हैं, जिसे आपको बिना अटके तुरंत बताना होता है।

Senior official conducting Technician Grade 3 Trade Test for Air Brake system]

Senior Technician’s Secret Tips (सीनियर उस्ताद के सीक्रेट टिप्स)

वर्कशॉप के उस्ताद हमेशा कहते हैं कि ट्रेड टेस्ट में कभी भी तुक्का मत मारो। अगर आपको किसी टूल का नाम या काम नहीं पता है, तो अफसर को साफ-साफ बता दें कि “सर, मैंने इस पर काम नहीं किया है”।

प्रैक्टिकल टेस्ट देने जाते समय सबसे पहले अपने सेफ्टी गियर (Safety Shoes, Helmet, Hand Gloves) पहनना कभी न भूलें। अफसर आपका काम देखने से पहले आपकी सेफ्टी को लेकर जागरूकता (Safety Culture) को नोटिस करते हैं।

वर्नियर कैलिपर या माइक्रोमीटर हाथ में लेते ही सबसे पहले उसका जीरो एरर (Zero Error) चेक करें। अगर आप बिना चेक किए रीडिंग बता देंगे, तो अफसर तुरंत समझ जाएगा कि आपको काम का असली तजुर्बा नहीं है।

जब भी एयर ब्रेक की बात हो और अफसर DV के बारे में पूछे, तो एक लाइन ज़रूर बोलें कि “DV एयर ब्रेक सिस्टम का दिमाग (Brain) होता है”। यह छोटी सी लाइन अफसर पर बहुत अच्छा प्रभाव डालती है और आपकी बेसिक समझ को साबित करती है।

फाइलिंग (Filing) करते समय अपनी बॉडी का पोश्चर (Posture) एकदम सही रखें और फाइल को एक रिदम में चलाएं। झटके से या गलत तरीके से रेती चलाने पर आप जल्दी थक जाएंगे और जॉब की फिनिशिंग भी खराब हो जाएगी।

Top 3 Viva/Interview FAQs (विभागीय परीक्षा और वाइवा के 3 सबसे ज़रूरी सवाल)

1. LHB और ICF कोच के सस्पेंशन और ब्रेक सिस्टम में मुख्य अंतर क्या है?

ICF कोच में डैशपॉट सस्पेंशन और बीएमबीसी (BMBC) ब्रेक सिस्टम का इस्तेमाल होता है, जबकि LHB कोच में फिएट (FIAT) बोगी और डिस्क ब्रेक (Disc Brake) सिस्टम लगा होता है। LHB का ब्रेक ज्यादा असरदार होता है और इसकी एंटी-टेलिस्कोपिक (Anti-telescopic) बॉडी हादसे के समय एक-दूसरे के ऊपर नहीं चढ़ती।

2. अगर ट्रेन में ब्रेक पाइप (BP) का प्रेशर अचानक गिर जाए तो क्या होगा, और इसे कैसे ठीक करेंगे?

BP प्रेशर गिरने से पूरी ट्रेन में अचानक ब्रेक (Emergency Brake) लग जाएंगे और गाड़ी रुक जाएगी। इसे ठीक करने के लिए सबसे पहले लीकेज की जगह ढूंढनी होगी (जैसे फटा हुआ होस पाइप या खुला हुआ एंगल कॉक), उसे बदलकर या बंद करके वापस 5.0 kg/cm2 प्रेशर बनाना होगा।

3. चक्के में कौन-कौन से मुख्य डिफेक्ट्स (Wheel Defects) आते हैं जिन्हें फिटर को तुरंत पहचानना चाहिए?

चक्के में शार्प फ्लैंज (Sharp Flange), थिन फ्लैंज (Thin Flange), फ्लैट टायर (Flat Tyre), और डीप फ्लैंज (Deep Flange) जैसी कमियां आती हैं। अगर टायर पर 50 mm (कोच के लिए) से ज्यादा का फ्लैट स्पॉट है, तो चक्के को तुरंत बदल देना चाहिए वरना डिरेलमेंट का खतरा रहता है।

एक बात हमेशा याद रखें, रेलवे में शॉर्टकट के लिए कोई जगह नहीं होती। ईमानदारी और लगन से सीखा हुआ काम ही ट्रेड टेस्ट में आपके काम आता है और आपको एक सफल उस्ताद बनाता है। चलते-चलते बस यही सलाह है कि अपने सीनियर्स की इज्जत करें और उनसे जितना हो सके प्रैक्टिकल काम सीखें।

Related Post:-

Leave a Comment