Wholesale Supplier Fraud 420 Notice भेजना अब हर उस व्यापारी के लिए ज़रूरी हो गया है, जिसने ऑनलाइन सप्लायर पर भरोसा करके एडवांस पेमेंट किया हो। IndiaMart, TradeIndia या Facebook पर माल का ऑर्डर देकर पेमेंट करने के बाद अक्सर सप्लायर फोन उठाना बंद कर देते हैं।
व्यापारी होने के नाते मुझे पता है कि जब लाखों रुपये फंसते हैं, तो कैसा महसूस होता है। मैं एक पूर्व साइबर सेल ऑफिसर हूँ, और मैंने ऐसे हज़ारों मामलों को बहुत करीब से हैंडल किया है।
अगर आपका एडवांस पैसा किसी फेक सप्लायर के पास चला गया है, तो घबराने की बिलकुल भी ज़रूरत नहीं है। कानूनी तरीके और सही ड्राफ्ट का इस्तेमाल करके आप अपना पैसा वापस ला सकते हैं।
आगे मैं आपको वह असली पुलिस और बैंक शिकायत का ड्राफ्ट दूंगा जो हकीकत में काम करता है। साइबर फ्रॉड से बचाव, बैंक रिफंड और कानूनी ड्राफ्ट्स से जुड़ी ऐसी ही प्रैक्टिकल जानकारी के लिए Sarkari Resultine पर विज़िट करें।
एक नज़र में ज़रूरी जानकारी
| फ्रॉड का प्रकार | शिकायत कहाँ करें | हेल्पलाइन नंबर | रिकवरी का समय (TAT) | ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स |
| B2B Advance Payment Fraud | 1930 हेल्पलाइन / साइबर थाना | 1930 | 7 से 15 दिन (अगर समय पर कंप्लेंट हो) | UTR कॉपी, चैट स्क्रीनशॉट, फर्जी बिल |
| Platform Listing Fraud | IndiaMart / TradeIndia सपोर्ट | प्लेटफॉर्म के टोल-फ्री नंबर | 24 से 72 घंटे (प्रोफाइल हटाने के लिए) | प्रोफाइल लिंक, पेमेंट स्लिप |
| Bank Dispute / Chargeback | अपने होम ब्रांच / नोडल ऑफिसर | बैंक का ऑफिशियल कस्टमर केयर | 30 से 45 दिन | साइबर सेल FIR कॉपी, ट्रांजैक्शन SMS |
शुरुआती 24 घंटे में क्या करें?
साइबर पुलिस की भाषा में फ्रॉड होने के तुरंत बाद के 24 घंटों को ‘गोल्डन आवर’ कहा जाता है। इस समय में लिया गया आपका एक सही एक्शन पूरे पैसे रिकवर करवा सकता है।
सबसे पहले 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें और उन्हें अपने साथ हुए B2B फ्रॉड की पूरी जानकारी दें। आपको ऑपरेटर को फ्रॉड सप्लायर का अकाउंट नंबर और अपना UTR नंबर तुरंत बताना होगा।
जैसे ही आप UTR बताएंगे, साइबर सेल उस सप्लायर के बैंक खाते को तुरंत फ्रीज़ (Freeze) कर देगी। अगर ठग ने पैसा निकाला नहीं होगा, तो आपकी मेहनत की कमाई उसी बैंक में लॉक हो जाएगी।
इसके तुरंत बाद अपने बैंक के टोल-फ्री नंबर पर कॉल करें और “Chargeback” या “Dispute” रेज़ करने को कहें। बैंक कर्मचारी अक्सर इसमें आनाकानी करते हैं, लेकिन आपको डटे रहना है।

सरकारी नियम और RBI की पूरी जानकारी
एक व्यापारी के तौर पर आपको अपने कानूनी अधिकार पता होने चाहिए। नए कानूनों के तहत फ्रॉड सप्लायर और बैंक दोनों के खिलाफ कड़े नियम बनाए गए हैं।
1. नया BNS कानून (IPC 420 की जगह अब Section 318):
पहले धोखाधड़ी के मामलों में IPC की धारा 420 लगाई जाती थी। जुलाई 2024 से लागू हुए नए कानून ‘भारतीय न्याय संहिता (BNS)’ के तहत अब Section 318(4) के तहत चीटिंग (Cheating) का मामला दर्ज़ होता है।
अगर सप्लायर ने एडवांस पैसे लेते समय ही माल न भेजने की नीयत रखी थी, तो यह सीधा Section 318 BNS का क्रिमिनल केस बनता है। पुलिस इस धारा में तुरंत FIR काट सकती है।
2. Section 316 BNS (अमानत में खयानत):
अगर सप्लायर असली है लेकिन पैसे लेने के बाद बेईमानी कर रहा है, तो यह Criminal Breach of Trust का मामला है। पहले यह IPC 406 था, जो अब Section 316 BNS बन चुका है।
3. IT Act 2000 (Section 66D):
कंप्यूटर या मोबाइल का इस्तेमाल करके किसी के साथ ऑनलाइन ठगी करना Section 66D के तहत गंभीर अपराध है। यह धारा B2B प्लेटफॉर्म्स पर फेक प्रोफाइल बनाने वाले स्कैमर्स पर सीधी लागू होती है।
4. RBI की Zero Liability Policy (2017 Circular):
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) का 6 जुलाई 2017 का मास्टर सर्कुलर ग्राहकों को भारी सुरक्षा देता है। अगर बैंक के सिस्टम की खामी से या थर्ड पार्टी ब्रीच से पैसे कटे हैं, तो ग्राहक की लायबिलिटी जीरो होती है।
भले ही आपने खुद पैसे ट्रांसफर किए हों, बैंक को सूचना देने के बाद अगर सप्लायर का खाता फ्रीज़ होता है, तो रिफंड की ज़िम्मेदारी बैंक की बनती है। बैंक आपको यह कहकर नहीं टाल सकता कि “आपने खुद पैसे भेजे थे।”
5. IT Act Section 79 (B2B प्लेटफॉर्म्स की ज़िम्मेदारी):
IndiaMart जैसे प्लेटफॉर्म्स खुद को Intermediary कहते हैं। लेकिन सेक्शन 79 के तहत अगर उनकी वेबसाइट पर कोई फेक सप्लायर बैठा है और शिकायत के बाद भी वो उसे नहीं हटाते, तो उन पर भी केस हो सकता है।
शिकायत के साथ लगाए जाने वाले सबूत
जब आप बैंक या साइबर सेल जाएं, तो आपके पास एक मजबूत फाइल होनी चाहिए। बिना दस्तावेज़ के पुलिस आपकी एक नहीं सुनेगी।
- Bank Statement & UTR: आपके खाते से पैसे कटने का स्टेटमेंट और ट्रांसफर का 12 अंकों का UTR नंबर।
- Proforma Invoice (PI) / Quotation: सप्लायर द्वारा भेजा गया वह फर्जी बिल या कोटेशन।
- WhatsApp Chats & Call Logs: सप्लायर के साथ हुई बातचीत के पूरे स्क्रीनशॉट (तारीख और समय के साथ)।
- Platform Profile Screenshot: IndiaMart या TradeIndia पर उस सप्लायर की प्रोफाइल का स्क्रीनशॉट।
- Transporter Details (अगर फेक बिल्टी हो): अगर उसने फेक ट्रांसपोर्ट बिल्टी भेजी है, तो उसकी स्पष्ट कॉपी।
Wholesale Supplier Fraud 420 Notice: लीगल ड्राफ्ट और पुलिस शिकायत का 100% सही फॉर्मेट
बैंक मैनेजर और पुलिस अक्सर टालमटोल करते हैं क्योंकि आम आदमी को एप्लीकेशन लिखनी नहीं आती। यहाँ मैं आपको एक ऐसा लीगल ड्राफ्ट दे रहा हूँ, जिसे देखकर बैंक मैनेजर भी आपकी बात गंभीरता से सुनेगा।
इस ड्राफ्ट में नए कानूनी सेक्शन (BNS 318 और RBI सर्कुलर) का ज़िक्र है। इसे कॉपी करके अपनी डिटेल्स भरें और बैंक व साइबर सेल में सबमिट करें।
प्रति,
श्रीमान शाखा प्रबंधक (Branch Manager) / श्रीमान थाना प्रभारी (SHO - Cyber Cell)
[आपके बैंक का नाम / पुलिस स्टेशन का नाम]
[बैंक/थाने का पता]
[शहर, पिन कोड]
विषय: Wholesale Supplier द्वारा एडवांस पेमेंट धोखाधड़ी (Fraud) - Section 318(4) BNS एवं IT Act 66D के तहत FIR दर्ज़ करने व Fraudulent Account को Freeze कर रिफंड दिलाने हेतु।
महोदय,
मैं [आपका नाम], [आपकी कंपनी का नाम] का प्रोपराइटर/डायरेक्टर हूँ और मेरा आपके बैंक में [खाता संख्या] है। मैं आपके संज्ञान में लाना चाहता हूँ कि दिनांक [फ्रॉड की तारीख] को मेरे साथ एक B2B प्लेटफॉर्म [IndiaMart/TradeIndia का नाम] के माध्यम से भारी आर्थिक धोखाधड़ी हुई है।
मैंने एक सप्लायर [सप्लायर की कंपनी का नाम], जिसका GST नंबर [सप्लायर का GST नंबर (अगर हो)] है, से [सामान का नाम] खरीदने के लिए संपर्क किया था। सप्लायर के कहने पर मैंने एडवांस पेमेंट के तौर पर [कुल रकम] रुपये उसके बताए गए बैंक खाते में ट्रांसफर किए।
ट्रांजैक्शन का विवरण इस प्रकार है:
1. ठग का नाम/कंपनी: [सप्लायर का नाम]
2. ठग का बैंक और खाता संख्या: [जिस खाते में पैसे भेजे]
3. ठग का IFSC Code: [IFSC कोड]
4. मेरा UTR / Reference Number: [12 अंकों का UTR नंबर]
5. ट्रांसफर की गई रकम: [रुपयों में रकम]
6. पेमेंट का समय और तारीख: [समय और तारीख]
पैसे प्राप्त होने के बाद, उक्त सप्लायर ने न तो माल भेजा और न ही पैसे वापस किए। अब उसने अपना मोबाइल नंबर [ठग का मोबाइल नंबर] बंद कर लिया है और मुझे ब्लॉक कर दिया है। यह स्पष्ट रूप से भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 318(4) (धोखाधड़ी), धारा 316 (अमानत में खयानत) एवं IT Act की धारा 66D के तहत एक सुनियोजित साइबर अपराध है।
मैंने 1930 साइबर हेल्पलाइन पर इसकी शिकायत दर्ज़ करा दी है (Acknowledgement No: [1930 शिकायत नंबर])। RBI के 6 जुलाई 2017 के "Customer Protection – Limiting Liability in Unauthorised Electronic Banking Transactions" सर्कुलर के तहत, मैंने आपको तय समय सीमा में सूचित कर दिया है।
अतः आपसे निवेदन है कि:
1. मेरी शिकायत के आधार पर तुरंत उक्त सप्लायर के फ्रॉड खाते को होल्ड/फ्रीज़ (Debit Freeze) किया जाए।
2. मेरे द्वारा ट्रांसफर की गई [रकम] रुपये की राशि को चार्ज-बैक (Chargeback) प्रक्रिया के तहत मेरे खाते में वापस रिवर्स (Reverse) किया जाए।
3. साइबर सेल इस मामले में तुरंत FIR दर्ज़ कर सप्लायर के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करे।
मैं इस शिकायत के साथ UTR रसीद, सप्लायर का फर्जी कोटेशन, और WhatsApp चैट्स की कॉपी संलग्न कर रहा हूँ।
धन्यवाद,
भवदीय,
हस्ताक्षर: _______________
नाम: [आपका नाम]
मोबाइल नंबर: [आपका नंबर]
ईमेल: [आपकी ईमेल आईडी]
दिनांक: [आज की तारीख]
संलग्नक: UTR कॉपी, चैट स्क्रीनशॉट, 1930 कंप्लेंट कॉपी।

ऑनलाइन शिकायत दर्ज़ करने का स्टेप-बाय-स्टेप तरीका
पुलिस स्टेशन के चक्कर काटने से पहले, भारत सरकार के पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज़ करना अनिवार्य है। इसके बिना कोई भी बैंक आपका पैसा वापस लाने की प्रक्रिया शुरू नहीं करेगा।
- पोर्टल ओपन करें: सबसे पहले अपने मोबाइल या लैपटॉप पर www.cybercrime.gov.in वेबसाइट खोलें।
- लॉगिन प्रक्रिया: होमपेज पर “File a Complaint” पर क्लिक करें और “Report Financial Fraud” को चुनें। अपना मोबाइल नंबर डालकर OTP से लॉगिन करें।
- इंसिडेंट डिटेल्स भरें: फॉर्म में “Online & Social Media Related Crime” चुनें। सब-कैटेगरी में “Online Fraud” या “E-Commerce Fraud” सेलेक्ट करें।
- ट्रांजैक्शन की जानकारी: यहाँ ठग का बैंक अकाउंट नंबर, आपका UTR नंबर और ट्रांसफर की गई रकम बिल्कुल सही-सही भरें। यह सबसे ज़रूरी स्टेप है।
- सस्पेक्ट (Suspect) की जानकारी: सप्लायर का नाम, उसका मोबाइल नंबर और उसकी IndiaMart/वेबसाइट की लिंक दर्ज करें।
- सबूत अपलोड करें: अपने PDF या JPEG फॉर्मेट में चैट स्क्रीनशॉट, पेमेंट स्लिप और सप्लायर का बिल अपलोड करें।
- सबमिट करें: पूरी जानकारी चेक करके फॉर्म सबमिट करें। आपको तुरंत एक 16 अंकों का Acknowledgement Number मिलेगा, जिसे भविष्य के लिए सुरक्षित कर लें।
अगर बैंक मैनेजर पैसे वापस करने से मना करे तो क्या करें?
कई बार बैंक मैनेजर आपको यह कहकर वापस भेज देते हैं कि “पैसा आपने खुद भेजा था, हम कुछ नहीं कर सकते।” यह सरासर गलत और RBI नियमों का उल्लंघन है।
एक बात हमेशा याद रखें (Pro-Tip): बैंक मैनेजर भगवान नहीं है। अगर वह आपकी शिकायत लेने से मना करे, तो तुरंत अपने बैंक के “Principal Nodal Officer” (PNO) को ईमेल करें।
अगर PNO भी 30 दिनों के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं देता है, तो आप सीधा RBI Ombudsman के पास जा सकते हैं। cms.rbi.org.in पर जाकर आप बैंक के खिलाफ मुफ्त में शिकायत दर्ज़ करा सकते हैं।
अगर सप्लायर बड़ा है और पैसा लाखों में है, तो आप किसी वकील के माध्यम से कोर्ट में धारा 175(3) BNSS (पुराना CrPC 156(3)) के तहत मजिस्ट्रेट से डायरेक्ट FIR का आदेश भी करवा सकते हैं।
साइबर एक्सपर्ट के सीक्रेट टिप्स – भविष्य में कैसे बचें
मैंने साइबर सेल में रहते हुए पाया कि 90% ठगी केवल व्यापारियों की छोटी सी लापरवाही से होती है। अगली बार माल मंगाने से पहले इन हैक्स का इस्तेमाल ज़रूर करें।
- GST Portal Verification: सप्लायर के दिए गए GST नंबर को हमेशा services.gst.gov.in पर जाकर ‘Search Taxpayer’ में चेक करें। अगर पोर्टल पर GST रद्द (Cancelled) या सस्पेंड दिखा रहा है, तो समझ जाइए कि वह फ्रॉड है।
- IndiaMart TrustSEAL: IndiaMart पर उसी सप्लायर से माल लें जिसके पास ‘TrustSEAL’ या ‘Verified Supplier’ का बैज हो। जो सप्लायर सिर्फ फ्री प्रोफाइल बनाकर बैठे हैं, वे सबसे ज़्यादा फ्रॉड करते हैं।
- Pay with IndiaMart / Escrow: कभी भी सप्लायर के पर्सनल खाते में सीधा RTGS या UPI न करें। B2B प्लेटफॉर्म्स के सुरक्षित पेमेंट गेटवे (जैसे Pay with IndiaMart) का इस्तेमाल करें, जिससे माल न आने पर रिफंड क्लेम किया जा सके।
- वीडियो कॉल वेरिफिकेशन: एडवांस पैसा देने से पहले सप्लायर को अचानक वीडियो कॉल करें और उसका वेयरहाउस/गोदाम दिखाने को कहें। साइबर ठग हमेशा वीडियो कॉल करने से बचते हैं।
- Sanchar Saathi Portal: अगर ठग का नंबर चालू है, तो sancharsaathi.gov.in के ‘चक्षु (Chakshu)’ पोर्टल पर जाकर उस नंबर को सस्पेक्टेड फ्रॉड के रूप में रिपोर्ट करें ताकि दूसरों को बचाया जा सके।
ज़रूरी सरकारी वेबसाइट्स और उनके काम
इंटरनेट पर ढेरों फर्जी वेबसाइट्स हैं जो रिफंड के नाम पर दोबारा ठगी करती हैं। अपने केस के लिए केवल इन्हीं आधिकारिक सरकारी वेबसाइट्स का इस्तेमाल करें:
- cybercrime.gov.in: साइबर फ्रॉड की राष्ट्रीय हेल्पलाइन और ऑनलाइन FIR दर्ज़ करने का इकलौता सही पोर्टल।
- cms.rbi.org.in: बैंक मैनेजर द्वारा सुनवाई न होने पर सीधा रिज़र्व बैंक (RBI) के लोकपाल को शिकायत करने की वेबसाइट।
- sancharsaathi.gov.in: फ्रॉड मोबाइल नंबर को ब्लॉक करने और भारत सरकार के दूरसंचार विभाग से मदद लेने का पोर्टल।
- services.gst.gov.in: सप्लायर के GST नंबर के असली या फर्जी होने की जांच करने के लिए आधिकारिक टैक्स पोर्टल।
- consumerhelpline.gov.in: अगर कंपनी रजिस्टर्ड है और माल में डिफेक्ट है, तो कंज्यूमर फोरम में केस दर्ज़ करने का सरकारी पोर्टल।
फ्रॉड के शिकार लोगों द्वारा अक्सर पूछे जाने वाले 5 सवाल
1. एडवांस पेमेंट फ्रॉड होने पर कितने समय में पैसा वापस मिल सकता है?
अगर आपने 2 से 4 घंटे के भीतर 1930 पर कॉल कर दिया, तो 7 से 15 दिनों में बैंक पैसा वापस कर सकता है। अगर सप्लायर ने पैसा निकाल लिया है, तो पुलिस केस खत्म होने तक इंतज़ार करना पड़ सकता है।
2. क्या IndiaMart जैसे प्लेटफॉर्म्स मेरे नुकसान की भरपाई करेंगे?
अगर ट्रांजैक्शन IndiaMart के पेमेंट गेटवे से हुआ है, तो उनके Payment Protection प्रोग्राम के तहत भरपाई हो सकती है। लेकिन डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर के मामलों में वे सीधे ज़िम्मेदार नहीं होते, आपको पुलिस की ही मदद लेनी होगी।
3. पुलिस कहती है कि यह सिविल मामला (Civil Dispute) है, मैं क्या करूँ?
पुलिस अक्सर क्रिमिनल केस से बचने के लिए इसे बिज़नेस डिस्प्यूट बता देती है। आपको अपने Wholesale Supplier Fraud 420 Notice में साफ लिखना होगा कि सप्लायर की नीयत शुरुआत से ही ठगी की थी, जिससे यह Section 318 BNS का पक्का क्रिमिनल केस बनता है।
4. क्या फ्रॉड सप्लायर का बैंक अकाउंट सच में ब्लॉक हो जाता है?
हाँ, 1930 पर दर्ज़ शिकायत सीधे सप्लायर के बैंक के नोडल ऑफिसर को जाती है। सिस्टम अलर्ट मिलते ही बैंक उस खाते को तुरंत डेबिट फ्रीज़ कर देता है।
5. मैंने सप्लायर को UPI से पेमेंट किया था, क्या चार्ज-बैक संभव है?
हाँ, NPCI की गाइडलाइंस के मुताबिक UPI से हुए फ्रॉड ट्रांजैक्शन पर भी चार्ज-बैक लिया जा सकता है। आपको अपनी BHIM या बैंक ऐप के ज़रिए ‘Report Fraud’ विकल्प का इस्तेमाल करना होगा।
चलते-चलते एक बात हमेशा याद रखें: अपनी लड़ाई आपको खुद लड़नी होगी, इसलिए ऊपर दिए गए ड्राफ्ट का प्रिंट निकालें और आज ही एक्शन लें!
