अगर आप किसी दोस्त या रिश्तेदार के साथ मिलकर रेस्टोरेंट या किराना दुकान शुरू करने जा रहे हैं, तो सबसे पहले आपको Business Partnership Deed Format in Hindi की ज़रूरत पड़ेगी। अक्सर लोग जोश-जोश में बिज़नेस शुरू कर लेते हैं, लेकिन जब मुनाफे या काम के बंटवारे की बात आती है, तो सबसे पक्के दोस्त भी दुश्मन बन जाते हैं।
एक बात हमेशा याद रखें (Pro-Tip), मुँह से बोला गया कोई भी एग्रीमेंट कोर्ट या सरकारी विभाग (जैसे GST या FSSAI) में नहीं माना जाता। अपनी मेहनत की कमाई और अपनी दोस्ती को बचाने के लिए एक सॉलिड ‘साझेदारी विलेख’ (Partnership Deed) बनाना सबसे अहम कदम है।
Quick Specs (एक नज़र में ज़रूरी जानकारी)
| डॉक्यूमेंट/प्रक्रिया का नाम | जारी करने वाला विभाग/कानून | सरकारी फीस (Stamp Duty) | वैधता (Validity) | जुर्माना/नुकसान (Penalty) |
| Partnership Deed | Indian Partnership Act, 1932 | राज्य के अनुसार (₹500 – ₹2000 या पूँजी का 1-2.5%) | जब तक फर्म भंग (Dissolve) न हो | बिना डीड के GST/FSSAI नहीं मिलेगा |
| Firm Registration | Registrar of Firms (ROF) | ₹1000 – ₹2000 (राज्य पर निर्भर) | लाइफटाइम | रजिस्टर्ड न होने पर किसी पर केस नहीं कर सकते |
| FSSAI License | Food Safety Dept. (FoSCoS) | ₹100 – ₹7500 (सालाना) | 1 से 5 साल | बिना लाइसेंस फूड बिज़नेस पर ₹5 लाख तक जुर्माना |
Business Importance (बिज़नेस में इसकी असली अहमियत क्या है?)
बिज़नेस शुरू करते समय सब कुछ अच्छा लगता है, लेकिन जब बात Zomato या Swiggy पर ऑनबोर्डिंग की आती है, तो बिना पैन कार्ड (PAN Card) के आपका अकाउंट चालू नहीं होता। फर्म का पैन कार्ड बनवाने के लिए आपके पास एक लीगल पार्टनरशिप डीड होना अनिवार्य है।
इसके अलावा बैंक में फर्म के नाम से Current Account खुलवाने के लिए भी यह डीड सबसे ज़रूरी दस्तावेज़ है। अगर डीड नहीं होगी, तो सारा पैसा किसी एक पार्टनर के सेविंग अकाउंट में जाएगा, जिससे इनकम टैक्स (Income Tax) का भारी नोटिस आ सकता है।

Government Rules & Legal Actions (सरकारी नियम और कानूनी पेनाल्टी)
इंडियन पार्टनरशिप एक्ट 1932 के सेक्शन 69 के तहत, अगर आपकी फर्म रजिस्टर्ड नहीं है, तो आप किसी भी थर्ड पार्टी (जैसे धोखेबाज़ सप्लायर) पर कोर्ट में केस नहीं कर सकते। हालांकि, डीड को नोटरी करवाना अनिवार्य है, लेकिन ROF (Registrar of Firms) में रजिस्ट्रेशन करवाना आपकी मर्जी पर निर्भर करता है।
वहीं फूड बिज़नेस की बात करें, तो FSSAI कानून के तहत पार्टनरशिप फर्म को लाइसेंस तभी मिलता है जब उनके पास अधिकृत डीड हो। अगर फूड इंस्पेक्टर चेकिंग के लिए आता है और उसे पता चलता है कि दुकान दो लोग चला रहे हैं लेकिन लाइसेंस सिर्फ एक के नाम (Proprietor) पर है, तो तुरंत दुकान सील हो सकती है।
Required Documents (ज़रूरी कागज़ात की लिस्ट)
पार्टनरशिप डीड बनवाने और बिज़नेस रजिस्टर करने के लिए आपको इन कागजातों की सख्त ज़रूरत होगी:
- दोनों पार्टनर्स का पैन कार्ड और आधार कार्ड (पहचान के लिए)।
- दुकान/रेस्टोरेंट का रेंट एग्रीमेंट या NOC (अगर ज़मीन अपनी है)।
- बिजली का बिल (Electricity Bill) कमर्शियल पते के प्रूफ के लिए।
- कैपिटल (पूँजी) निवेश का बैंक स्टेटमेंट या प्रूफ।
- सही मूल्य का ई-स्टाम्प पेपर (E-Stamp Paper) जिस पर यह डीड प्रिंट होगी।
Business Partnership Deed Format in Hindi (लीगल ड्राफ्ट / नोटिस जवाब का 100% सही फॉर्मेट)
नीचे दिया गया ड्राफ्ट एक स्टैंडर्ड और सुरक्षित एग्रीमेंट है जिसे आप अपने हिसाब से बदल सकते हैं। इसे कॉपी करें, अपनी डिटेल्स भरें और इसे ई-स्टाम्प पेपर पर प्रिंट करवा लें।
साझेदारी विलेख (Partnership Deed)
यह साझेदारी विलेख (Partnership Deed) आज दिनांक [तारीख] को [शहर/स्थान का नाम] में निम्नलिखित पक्षों के बीच निष्पादित (Execute) किया गया है:
प्रथम पक्ष (First Partner):
नाम: [आपका नाम]
पिता का नाम: [पिता का नाम]
उम्र: [उम्र] वर्ष
निवासी: [आपका पूरा पता]
पहचान पत्र: [आधार नंबर / पैन नंबर]
द्वितीय पक्ष (Second Partner):
नाम: [आपके पार्टनर का नाम]
पिता का नाम: [पिता का नाम]
उम्र: [उम्र] वर्ष
निवासी: [पार्टनर का पूरा पता]
पहचान पत्र: [आधार नंबर / पैन नंबर]
(यदि 2 से ज्यादा पार्टनर हों, तो तृतीय पक्ष आदि इसी प्रकार जोड़ें)
चूंकि दोनों पक्ष आपसी सहमति से "[दुकान/रेस्टोरेंट का नाम]" के नाम से एक [रेस्टोरेंट / किराना / क्लाउड किचन] का बिज़नेस शुरू करना चाहते हैं। भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद से बचने के लिए, यह पार्टनरशिप डीड निम्नलिखित नियमों और शर्तों (Terms & Conditions) के साथ बनाई जा रही है:
1. फर्म का नाम: इस साझेदारी फर्म का नाम "मैसर्स [दुकान/रेस्टोरेंट का नाम]" होगा।
2. बिज़नेस का स्थान: इस फर्म का मुख्य बिज़नेस [दुकान का पूरा पता] पर संचालित किया जाएगा। पार्टनर्स चाहें तो आपसी सहमति से अन्य ब्रांच भी खोल सकते हैं।
3. बिज़नेस की प्रकृति (Nature of Business): यह फर्म मुख्य रूप से [फ़ूड डिलीवरी, रेस्टोरेंट, कैफ़े, या किराना] और उससे जुड़े सभी कमर्शियल कार्य करेगी।
4. बिज़नेस शुरू होने की तारीख: यह साझेदारी दिनांक [बिज़नेस शुरू होने की तारीख] से प्रभावी मानी जाएगी।
5. पूँजी निवेश (Capital Contribution): फर्म में कुल निवेश [कुल पूँजी राशि] रुपये होगा। इसमें प्रथम पक्ष [रुपये] और द्वितीय पक्ष [रुपये] का निवेश करेगा।
6. लाभ और हानि का बंटवारा (Profit & Loss Sharing): फर्म का जो भी शुद्ध लाभ (Net Profit) या नुकसान होगा, वह सभी खर्चों और टैक्स के भुगतान के बाद, निम्नलिखित अनुपात में बांटा जाएगा:
- प्रथम पक्ष: [50]%
- द्वितीय पक्ष: [50]%
7. बैंक खाता (Bank Account): फर्म के नाम से एक चालू खाता (Current Account) [बैंक का नाम] या किसी भी राष्ट्रीयकृत/प्राइवेट बैंक में खोला जाएगा। इस खाते का संचालन दोनों पार्टनर्स के संयुक्त हस्ताक्षर (Joint Signatures) से किया जाएगा।
8. पार्टनर्स का वेतन (Remuneration to Working Partners): इनकम टैक्स एक्ट 1961 के सेक्शन 40(b) के नियमों के अनुसार, जो भी पार्टनर बिज़नेस में एक्टिव रूप से काम करेगा, उसे फर्म के मुनाफे से पहले [महीने का वेतन राशि] रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाएगा।
9. हिसाब-किताब (Books of Accounts): फर्म का हर वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक होगा। फर्म की अकाउंट बुक्स दुकान पर ही रखी जाएंगी और कोई भी पार्टनर किसी भी समय इसकी जांच कर सकेगा।
10. विवाद का निपटारा (Arbitration Clause): यदि भविष्य में पार्टनर्स के बीच कोई विवाद या मतभेद होता है, तो वे सीधे कोर्ट जाने के बजाय, 'Arbitration and Conciliation Act 1996' के तहत किसी निष्पक्ष व्यक्ति (Arbitrator) को नियुक्त करके मामले को सुलझाएंगे।
हम, उपरोक्त दोनों पक्षों ने बिना किसी दबाव के, पूरे होश-ओ-हवास में इस डीड को पढ़ और समझ लिया है, और गवाहों की मौजूदगी में इस पर अपने हस्ताक्षर किए हैं।
दिनांक: [तारीख]
स्थान: [शहर का नाम]
हस्ताक्षर प्रथम पक्ष: ___________________
(नाम: [आपका नाम])
हस्ताक्षर द्वितीय पक्ष: ___________________
(नाम: [पार्टनर का नाम])
गवाह 1 (Witness 1):
नाम: ______________
हस्ताक्षर: __________
पता: ______________
गवाह 2 (Witness 2):
नाम: ______________
हस्ताक्षर: __________
पता: ______________
Step-by-Step Online Process (अप्लाई करने या जवाब भेजने का सही तरीका)
डीड तैयार करने के बाद सबसे पहले अपने राज्य के नियमों के अनुसार ₹1000 या उचित मूल्य का ई-स्टाम्प पेपर (E-Stamp) खरीदें। फिर ऊपर दिए गए ड्राफ्ट को उस स्टाम्प पेपर पर प्रिंट करवा लें।
इसके बाद दोनों पार्टनर्स और दो गवाहों (Witnesses) को हर पेज पर हस्ताक्षर करने होंगे। अंत में इस डीड को स्थानीय नोटरी (Notary Public) के पास ले जाकर अटेस्ट (Attest) करवा लें। इसी डीड की कॉपी लगाकर आप NSDL पोर्टल से फर्म का पैन कार्ड और Udyam Portal से MSME रजिस्ट्रेशन ले सकते हैं।
![FSSAI License for Partnership Firm]](https://sarkariresultine.com/wp-content/uploads/2026/09/Gemini_Generated_Image_9cxtpw9cxtpw9cx-50kb-1024x571.jpeg)
Rejection & Solutions (फॉर्म रिजेक्ट होने या फूड इंस्पेक्टर के परेशान करने पर क्या करें?)
कई बार Zomato या Swiggy पर रजिस्ट्रेशन के समय डीड रिजेक्ट हो जाती है क्योंकि डीड में लिखे फर्म के नाम और FSSAI सर्टिफिकेट के नाम में स्पेलिंग की गलती होती है। सॉल्यूशन यही है कि जो नाम आपने डीड में तय किया है, बिल्कुल वही स्पेलिंग हर सरकारी डॉक्यूमेंट में इस्तेमाल करें।
अगर फूड इंस्पेक्टर FSSAI पोर्टल (FoSCoS) पर आपकी एप्लीकेशन रिजेक्ट करता है, तो इसका सबसे बड़ा कारण नोटरी की मोहर का साफ न होना या रेंट एग्रीमेंट का डीड से मैच न होना होता है। ऐसी स्थिति में, एक स्पष्ट एफिडेविट (Affidavit) लगाएं जिसमें लिखा हो कि दुकान का मालिक आपके बिज़नेस को पार्टनरशिप में चलाने की अनुमति (NOC) दे रहा है।
C.A. / Consultant’s Secret Tips (बिज़नेस एक्सपर्ट के सीक्रेट टिप्स – पैसे कैसे बचाएं)
Tip 1: इनकम टैक्स बचाएं (Section 40b): डीड में हमेशा यह क्लॉज़ ज़रूर डालें कि “पार्टनर्स को सैलरी मिलेगी”। ऐसा करने से फर्म के मुनाफे (Profit) में से सैलरी का हिस्सा कट जाता है, जिससे फर्म को इनकम टैक्स कम देना पड़ता है और पैसा पार्टनर्स के पास लीगल तरीके से आ जाता है।
Tip 2: Arbitration Clause का जादू: कभी भी अपनी डीड में Arbitration का पॉइंट डालना न भूलें। अगर कल को पार्टनर धोखा देता है, तो आप सालों-साल सिविल कोर्ट के चक्कर काटने से बच जाएंगे और प्राइवेट मध्यस्थता (Arbitrator) के ज़रिए मामला कुछ ही महीनों में सुलझ जाएगा।
लोकल बिज़नेस, फूड लाइसेंस और एग्रीमेंट्स से जुड़ी ऐसी ही प्रैक्टिकल जानकारी के लिए Sarkari Resultine पर विज़िट करें।
Top 5 FAQs (दुकानदारों द्वारा अक्सर पूछे जाने वाले 5 सवाल)
1. क्या पार्टनरशिप डीड को रजिस्टर करवाना अनिवार्य है?
भारतीय कानून (Indian Partnership Act) के अनुसार इसे Registrar of Firms (ROF) में रजिस्टर करवाना पूरी तरह अनिवार्य नहीं है। लेकिन पैन कार्ड बनवाने और बैंक खाता खोलने के लिए इसे नोटरी करवाना बहुत ज़रूरी है।
2. रेस्टोरेंट खोलने के लिए कितने रुपये का स्टाम्प पेपर लगता है?
यह आपके राज्य पर निर्भर करता है। ज़्यादातर राज्यों में 500 से 1000 रुपये के स्टाम्प पेपर पर डीड बन जाती है, लेकिन बिहार या महाराष्ट्र जैसे राज्यों में पूँजी (Capital) का एक निश्चित प्रतिशत (जैसे 1% या 2.5%) स्टाम्प ड्यूटी के रूप में लगता है।
3. क्या पार्टनरशिप फर्म के लिए FSSAI लाइसेंस अलग से लेना पड़ता है?
जी हाँ, अगर आप दो लोग मिलकर फूड बिज़नेस कर रहे हैं, तो आपको प्रोपराइटरशिप के बजाय “पार्टनरशिप” (Partnership) केटेगरी के तहत FoSCoS पोर्टल पर अप्लाई करना होगा। इसके लिए डीड अपलोड करना अनिवार्य है।
4. अगर एक पार्टनर बिज़नेस छोड़ना चाहे तो क्या होगा?
डीड में ‘Retirement of Partner’ का एक क्लॉज़ होता है। इसके तहत कोई भी पार्टनर 1 से 3 महीने का लिखित नोटिस देकर बिज़नेस से बाहर हो सकता है। उसका जो भी हिसाब बनेगा, वह फर्म उसे चुका देगी।
5. क्या बिना पार्टनरशिप डीड के Zomato या Swiggy पर दुकान जोड़ सकते हैं?
बिल्कुल नहीं। Zomato/Swiggy वाले फर्म का पैन कार्ड, GST और उसी नाम का बैंक अकाउंट मांगते हैं। ये तीनों चीज़ें बिना लीगल पार्टनरशिप डीड के बन ही नहीं सकतीं।
