ज़मीन की मापी (Naapi) कराना किसी भी ज़मीन मालिक का पहला और सबसे अहम कानूनी हक़ है। जब भी पड़ोसियों या रिश्तेदारों से बाउंड्री (मेड़) का विवाद हो, तो अंचलाधिकारी (CO) को लिखित आवेदन देना सबसे ज़रूरी कदम होता है। इसलिए आपको पता होना चाहिए कि अंचलाधिकारी (CO) को ज़मीन की मापी (Naapi) के लिए आवेदन कैसे दें?
अक्सर लोग ज़ुबानी तौर पर झगड़ा करते हैं, जिससे पुलिस केस बन जाता है। एक समझदार नागरिक होने के नाते आपको सबसे पहले कागज़ी कार्रवाई करनी चाहिए। CO (Circle Officer) आपके अंचल (Block) का सबसे बड़ा राजस्व अधिकारी होता है। सरकारी अमीन उसी के आदेश पर आपकी ज़मीन नापने आता है।
आजकल E-Mapi Portal Bihar के ज़रिए यह काम ऑनलाइन भी होता है। लेकिन कई बार पोर्टल काम नहीं करता या मामला ज़्यादा विवादित होता है। ऐसे में आपको सीधे CO ऑफिस जाकर एक सटीक ड्राफ्ट किया हुआ आवेदन देना पड़ता है।
प्रशासनिक जागरूकता और ड्राफ्टिंग से जुड़ी ऐसी ही अन्य महत्वपूर्ण जानकारी के लिए Sarkari Resultine पर विज़िट करें।
एक नज़र में ज़रूरी जानकारी (Quick Specs)
ज़मीन की मापी के लिए आवेदन करने से पहले कुछ बेसिक बातें आपको पता होनी चाहिए। नीचे दी गई टेबल में सारी ज़रूरी जानकारी एक जगह दी गई है।
| जानकारी का प्रकार | मुख्य विवरण |
| किसको लिखें | अंचलाधिकारी (CO – Circle Officer) को। |
| संबंधित विभाग | राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग (Revenue & Land Reforms Department)। |
| लगने वाला समय | सामान्य मापी: 30 दिन। तत्काल (Urgent) मापी: 10 दिन। (नए नियम के तहत निर्विवाद ज़मीन 7 दिन में)। |
| ज़रूरी कागज़ात | करेंट लगान रसीद, केवाला/खतियान, मापी फीस का चालान, आधार/पहचान पत्र। |
| कौन सा कानून/धारा लागू | Bihar Land Disputes Resolution Act, 2009 (Section 4)। |
| सरकारी फीस (ग्रामीण) | ₹500 (नॉर्मल) और ₹1000 (तत्काल) प्रति खसरा। |
| सरकारी फीस (शहरी) | ₹1000 (नॉर्मल) और ₹2000 (तत्काल) प्रति खसरा। |
इस पत्र/शिकायत की असली अहमियत क्या है? (Real-World Importance)
सरकारी दफ्तरों का एक कड़वा सच जान लीजिए। वहां मौखिक (Verbal) बातों की कोई औकात नहीं होती।
आप CO बाबू के सामने कितना भी रो लें, जब तक आपकी लिखित Application उनकी टेबल पर नहीं होगी, कोई फाइल नहीं खुलेगी। एक अच्छी तरह से लिखा गया पत्र सिर्फ एक कागज़ नहीं होता। यह आपकी कानूनी ढाल होता है।
जब आप लिखित में मापी (Demarcation) की मांग करते हैं, तो सिस्टम को रिकॉर्ड में जवाब देना पड़ता है। अगर कल को ज़मीन पर कब्ज़ा होता है, तो यही Receiving वाला पत्र कोर्ट में साबित करेगा कि आपने समय रहते प्रशासन को सूचना दी थी।
इसे हल्के में न लें। एक मज़बूत ड्राफ्टिंग आपके केस को 50% पहले ही जिता देती है।

सरकारी नियम और आपकी कानूनी ताकत (Government Rules & Laws)
आपको अपने कानूनी अधिकारों का पता होना चाहिए ताकि कोई सरकारी बाबू आपको गुमराह न कर सके।
Bihar Land Disputes Resolution Act, 2009 का Section 4 स्पष्ट रूप से कहता है कि बाउंड्री विवाद (Boundary Disputes) सुलझाने का अधिकार CO और DCLR के पास है। यानी CO आपको यह कहकर नहीं भगा सकता कि “यह मेरा काम नहीं है”।
हाल ही में (2026 के नए ई-मापी नियमों के अनुसार), सरकार ने सख़्त आदेश दिए हैं। अगर ज़मीन पर कोई विवाद नहीं है, तो आवेदन मिलने के 7 दिनों के भीतर अमीन को मापी पूरी करनी होगी।
मापी पूरी होने के बाद, अमीन को अगले 14 दिनों के अंदर अपनी रिपोर्ट ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करनी ही होगी।
अगर पड़ोसी दबंग है और मापी के दिन बवाल करने की धमकी देता है, तो आप BNSS की धारा 163 (पुराना CrPC 144) का इस्तेमाल कर सकते हैं। आप CO को लिखकर दे सकते हैं कि मापी के दौरान पुलिस बल (Police Protection) मुहैया कराया जाए।
आवेदन के साथ लगाए जाने वाले ज़रूरी कागज़ात (Required Documents)
आपकी एप्लीकेशन तभी पास होगी जब उसके साथ सही कागज़ात लगे हों। आधी-अधूरी फाइलें हमेशा रिजेक्ट कर दी जाती हैं।
आवेदन जमा करते समय इन दस्तावेज़ों की फोटोकॉपी (Self-Attested) ज़रूर लगाएं:
- अद्यतन (Current) लगान रसीद: ज़मीन का करेंट साल का मालगुज़ारी रसीद कटा होना चाहिए।
- केवाला या खतियान की कॉपी: जिससे साबित हो कि ज़मीन का मालिकाना हक़ आपका है।
- पहचान पत्र: आपका कोई भी सरकारी आईडी (जैसे वोटर आईडी या अन्य पहचान पत्र की कॉपी)।
- शपथ पत्र (Affidavit): ई-मापी के नए नियमों के तहत अब एक शपथ पत्र भी लगता है कि आप स्वेच्छा से मापी करा रहे हैं।
- चालान की कॉपी: जो आपने मापी की सरकारी फीस (₹500 या ₹1000 जो भी लागू हो) ऑनलाइन या बैंक में जमा की है।
अंचलाधिकारी (CO) को ज़मीन की मापी (Naapi) के लिए आवेदन कैसे दें? (एप्लीकेशन का 100% सही फॉर्मेट)
यहाँ नीचे एक बेहद सटीक और कानूनी रूप से मज़बूत एप्लीकेशन का फॉर्मेट दिया गया है। आप इसे सीधे कॉपी करके अपने खाली कागज़ पर उतार सकते हैं। बस ब्रैकेट [...] में दी गई जानकारी को अपने हिसाब से बदल लें।
सेवा में,
श्रीमान अंचलाधिकारी महोदय (CO),
[अंचल का नाम], [जिले का नाम]
विषय: खाता नं [00], खेसरा (प्लॉट) नं [00] की सरकारी अमीन द्वारा सीमांकन (मापी) कराने हेतु आवेदन।
महाशय,
सविनय निवेदन है कि मैं [आपका नाम], पिता [पिता का नाम], ग्राम [गाँव का नाम], पंचायत [पंचायत का नाम] का स्थायी निवासी हूँ।
मेरी रैयती ज़मीन मौजा [मौजा का नाम], थाना नंबर [000] में स्थित है। इसका खाता नंबर [00], खेसरा नंबर [00] और कुल रकबा [ज़मीन का क्षेत्रफल, जैसे- 10 डिसमिल] है। इस ज़मीन की वर्तमान लगान रसीद मेरे नाम से कटी हुई है और मेरे पास इसके सभी वैध कागज़ात मौजूद हैं।
महोदय, वर्तमान में मेरे और मेरे चौहद्दीदार [पड़ोसी का नाम] के बीच मेड़ (बाउंड्री) को लेकर संशय और विवाद उत्पन्न हो गया है। शांति व्यवस्था बनाए रखने और सही सीमांकन के लिए मैं अपनी ज़मीन की सरकारी अमीन से मापी (Naapi) कराना चाहता हूँ। मैंने मापी का निर्धारित सरकारी शुल्क चालान के माध्यम से जमा कर दिया है।
अतः श्रीमान से नम्र निवेदन है कि मेरे आवेदन को स्वीकार करते हुए, जल्द से जल्द एक सरकारी अमीन नियुक्त करने की कृपा करें। ताकि मेरी ज़मीन की विधिवत मापी हो सके और विवाद का स्थायी समाधान निकल सके।
सधन्यवाद।
संलग्नक (Attachments):
1. ज़मीन की अद्यतन (करेंट) लगान रसीद
2. केवाला/खतियान की छायाप्रति
3. मापी शुल्क का जमा चालान
4. [पहचान पत्र की फोटोकॉपी]
5. शपथ पत्र
भवदीय,
हस्ताक्षर: .......................
नाम: [आपका नाम]
पूरा पता: [आपका पता]
मोबाइल नंबर: [आपका मोबाइल नंबर]
दिनांक: [DD/MM/YYYY]
[Note:-Copy this application Ms World or Google Doc for Pdf ]
पत्र भेजने और रिसीविंग लेने का सही तरीका (Step-by-Step Submission Process)
आवेदन लिख लेना ही काफी नहीं है, उसे सही तरीके से जमा करना सबसे बड़ी कला है।
ऑनलाइन तरीका: सबसे पहले E-Mapi Portal पर जाएं और अपनी आईडी बनाकर ऑनलाइन अप्लाई करें। वहां सारे कागज़ पीडीएफ में अपलोड करें और ऑनलाइन पेमेंट कर दें। आपको तुरंत एक Application Number मिल जाएगा।
ऑफलाइन तरीका (अंचल कार्यालय में): अगर पोर्टल काम नहीं कर रहा है, तो ऊपर दिए गए ड्राफ्ट को कागज़ पर लिखें। सभी दस्तावेज़ों की एक-एक फोटोकॉपी स्टेपल करें।
एक बात हमेशा याद रखें, एप्लीकेशन की दो कॉपी (Two Copies) लेकर जाएं।
ओरिजिनल कॉपी CO ऑफिस के आवक शाखा (Receipt Counter) पर जमा कर दें। दूसरी कॉपी पर क्लर्क से ‘Receiving’ (पावती) ज़रूर लें।
Receiving का मतलब है कि क्लर्क उस पर अपनी मुहर लगाएगा, आज की तारीख डालेगा और पत्रांक (Dispatch Number) लिखेगा। बिना Receiving के आपका आवेदन कचरे के डिब्बे में जा सकता है, इसलिए इसे कभी न भूलें।

अधिकारी कार्रवाई न करे तो क्या करें? (Action Not Taken?)
अगर आपने आवेदन दे दिया और 30 दिन बीत जाने के बाद भी कोई अमीन नहीं आया, तो शांत मत बैठिए।
आपका अगला कदम DCLR (Deputy Collector Land Reforms) के ऑफिस जाना होना चाहिए। अपनी Receiving की कॉपी के साथ DCLR को एक शिकायत पत्र लिखें कि CO मेरी ज़मीन की मापी नहीं करवा रहे हैं।
अगर DCLR भी आपकी नहीं सुनता है, तो सीधे SDM (Sub-Divisional Magistrate) या DM (District Magistrate) के जनता दरबार में पहुंच जाएं।
सबसे अचूक हथियार है “लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम” (Public Grievance Redressal)। आप अनुमंडल स्तर पर लोक शिकायत में केस फाइल कर दें। वहां अधिकारी को तय समय सीमा के अंदर आपको सामने बैठाकर जवाब देना ही पड़ेगा।
वकील के सीक्रेट टिप्स – काम जल्दी कैसे करवाएं (Advocate’s Secret Tips)
एक वकील के तौर पर मैं आपको कुछ ऐसे ‘जुगाड़’ और कानूनी ट्रिक्स बता रहा हूँ जो आम लोगों को पता नहीं होते।
सीक्रेट ट्रिक 1: RTI का डर दिखाएं: अगर CO ऑफिस आपके आवेदन को लटका रहा है, तो एक महीने बाद ₹10 का पोस्टल ऑर्डर लगाकर RTI लगा दें। सीधे पूछें कि “मेरे पत्रांक संख्या फलां-फलां पर अब तक क्या कार्रवाई हुई है, उसकी डेली डायरी रिपोर्ट दें।” RTI का नाम सुनते ही बाबू लोगों के पसीने छूट जाते हैं और फाइल दौड़ने लगती है।
सीक्रेट ट्रिक 2: पुलिस प्रोटेक्शन मांगें: अगर आपको लगता है कि मापी के वक्त पड़ोसी मारपीट करेगा, तो CO के साथ-साथ स्थानीय थाना प्रभारी (SHO) को भी एक आवेदन दें। उनसे निवेदन करें कि मापी के दिन “विधि व्यवस्था” (Law and Order) बनाए रखने के लिए पुलिस बल भेजा जाए।
सीक्रेट ट्रिक 3: CM Helpline का इस्तेमाल: अगर ब्लॉक स्तर पर बात नहीं बन रही है, तो अपने राज्य के मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर (जैसे बिहार में Janta Darbar या ऑनलाइन पोर्टल) पर शिकायत दर्ज करा दें। ऊपर से जब प्रेशर आता है, तो CO खुद आपको फोन करके अमीन भेजेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले 3 महत्वपूर्ण सवाल (Top 3 FAQs)
1. सरकारी अमीन ज़मीन नापने के लिए कितनी फीस लेता है?
फीस इस बात पर निर्भर करती है कि ज़मीन ग्रामीण है या शहरी। ई-मापी पोर्टल के अनुसार ग्रामीण इलाके में नॉर्मल मापी ₹500 और अर्जेंट ₹1000 प्रति खसरा है। शहरी इलाके में नॉर्मल ₹1000 और अर्जेंट ₹2000 प्रति खसरा लगती है।
2. अगर पड़ोसी अमीन को ज़मीन नापने से रोके तो क्या करें?
अमीन को रोकने का मतलब है सरकारी काम में बाधा डालना। अगर पड़ोसी ऐसा करता है, तो अमीन अपनी डायरी में रिपोर्ट लिखकर CO को देगा। इसके बाद आप पुलिस स्टेशन जाकर BNS (भारतीय न्याय संहिता) की धाराओं के तहत पड़ोसी पर FIR दर्ज करवा सकते हैं।
3. क्या प्राइवेट अमीन से मापी कराना कानूनी रूप से मान्य है?
प्राइवेट अमीन से मापी कराकर आप अपना मन तो शांत कर सकते हैं, लेकिन कोर्ट या थाने में उसकी रिपोर्ट की कोई कानूनी वैल्यू (Legal Sanctity) नहीं होती। कोर्ट हमेशा सिर्फ सरकारी अमीन की रिपोर्ट को ही सबूत के तौर पर मानता है।
चलते-चलते एक ही सलाह दूँगा—कागज़ मज़बूत रखिए, सिस्टम को आपके आगे झुकना ही पड़ेगा।
