Parimarjan Plus Portal Bihar: ज़मीन के कागज़ों में एक छोटी सी गलती भी इंसान को कोर्ट-कचहरी के कई सालों तक चक्कर कटवा सकती है। मैं अपने सालों के पटवारी और रेवेन्यू विभाग के अनुभव से बता रहा हूँ कि बिहार में जब ज़मीनों का रिकॉर्ड ऑनलाइन हुआ, तो हज़ारों लोगों के नाम और खाता नंबर गलत टाइप हो गए।

इन्हीं गलतियों को सुधारने के लिए सरकार ने Parimarjan Portal शुरू किया था, जिसे अब अपडेट करके परिमार्जन प्लस (Parimarjan Plus) कर दिया गया है। आसान भाषा में समझें तो यह एक ऐसा ऑनलाइन अस्पताल है जहाँ आपके बीमार यानी गलत ज़मीन के कागज़ों का इलाज होता है।

चाहे आपके दादाजी का नाम गलत हो गया हो या खतियान में रकबा (Area) कम दिख रहा हो, यह पोर्टल आपका सबसे बड़ा हथियार है। आज मैं आपको एक वकील और पटवारी की नज़र से वो सारी बातें बताऊंगा जो आपको कोई दलाल नहीं बताएगा।

Parimarjan Portal Bihar Homepage

Quick Specs/Facts (एक नज़र में ज़रूरी जानकारी)

पोर्टल पर जाने से पहले आपको इसके कुछ बुनियादी नियम पता होने चाहिए। नीचे दी गई टेबल में मैंने ज़रूरी बातें बहुत ही कम शब्दों में बताई हैं, ताकि आपको एक ही नज़र में पूरी बात समझ आ जाए।

जानकारी का प्रकारमहत्वपूर्ण विवरण
पोर्टल का नया नामपरिमार्जन प्लस (Parimarjan Plus)
सरकारी विभागराजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार
आवेदन की फीसबिल्कुल मुफ्त (₹0)
टाइम लिमिट (नया नियम)15 दिन (नाम सुधार), 35 दिन (खाता/खेसरा), 75 दिन (जटिल मामले)
आधिकारिक वेबसाइटBihar Bhumi Portal
सबसे ज़रूरी कागज़नोटरी द्वारा प्रमाणित शपथ पत्र (Affidavit)

Real-World Importance (ज़मीन के मामलों में इसकी असली अहमियत क्या है?)

आप सोच रहे होंगे कि अगर ज़मीन पर मेरा कब्ज़ा है, तो ऑनलाइन कागज़ में नाम गलत होने से क्या फर्क पड़ता है? एक पटवारी होने के नाते मैंने सैकड़ों परिवारों को सिर्फ एक स्पेलिंग मिस्टेक की वजह से सड़क पर आते देखा है।

1. ज़मीन बेचने में रुकावट: अगर जमाबंदी (Jamabandi) में आपका नाम “राम कुमार” की जगह “श्याम कुमार” चढ़ गया है, तो आप उस ज़मीन की रजिस्ट्री नहीं कर सकते। कोई भी समझदार खरीदार ऐसी विवादित ज़मीन पर एक रुपया भी नहीं लगाएगा।

2. बैंक लोन और केसीसी (KCC) का रिजेक्शन: किसान क्रेडिट कार्ड या ज़मीन पर होम लोन लेते समय बैंक वाले सबसे पहले ऑनलाइन लगान रसीद और जमाबंदी चेक करते हैं। खाता या खेसरा नंबर में ज़रा भी गड़बड़ी होने पर बैंक मैनेजर आपका लोन तुरंत रिजेक्ट कर देगा।

3. सरकारी मुआवज़े का भारी नुकसान: मान लीजिए आपकी ज़मीन से कोई हाईवे निकल रहा है और सरकार आपको लाखों का मुआवज़ा दे रही है। अगर ऑनलाइन रिकॉर्ड में ज़मीन का रकबा (Area) कम दर्ज है, तो आपको मुआवज़ा भी कम ही मिलेगा।

4. पारिवारिक बंटवारे में खून-खराबा: गलत रिकॉर्ड की वजह से भाइयों के बीच ज़मीन का सही बंटवारा (Partition) नहीं हो पाता है। बाद में यही छोटी सी टाइपिंग मिस्टेक पुश्तैनी दुश्मनी और कोर्ट केस का कारण बन जाती है।

5. सरकारी योजनाओं से बाहर होना: पीएम किसान सम्मान निधि (PM Kisan) जैसी योजनाओं का पैसा सीधे खाते में आता है। अगर ऑनलाइन ज़मीन के रिकॉर्ड में आपका नाम आधार कार्ड से मैच नहीं करेगा, तो आपका पैसा हमेशा के लिए रुक जाएगा।

ज़मीन के कागज़ हमेशा आईने की तरह साफ होने चाहिए। इसीलिए परिमार्जन पोर्टल पर अपनी ज़मीन का रिकॉर्ड सुधारना आपकी सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

Government Rules & Guidelines (सरकारी नियम और कानून क्या कहते हैं?)

बिहार सरकार के राजस्व विभाग ने हाल ही में परिमार्जन नियमों में बहुत बड़े बदलाव किए हैं। अब सीओ (CO – Circle Officer) और राजस्व कर्मचारियों की मनमानी नहीं चलेगी क्योंकि सरकार ने हर काम के लिए सख्त टाइम लिमिट फिक्स कर दी है।

पहला नियम – 15 दिन की मोहलत: अगर आपके रिकॉर्ड में सिर्फ टाइपिंग की गलती है जैसे नाम, पिता का नाम या जाति गलत है। तो सीओ को यह सुधार हर हाल में 15 कार्य दिवस (Working Days) के अंदर करना होगा।

दूसरा नियम – 35 दिन का समय: अगर मामला थोड़ा तकनीकी है जैसे खाता नंबर, खेसरा नंबर या लगान की राशि गलत दर्ज हो गई है। ऐसे मामलों का निपटारा राजस्व विभाग को 35 दिनों के भीतर करना ही होगा।

तीसरा नियम – 75 दिन की समय सीमा: अगर किसी की पूरी की पूरी जमाबंदी ही ऑनलाइन छूट गई है या फिर ज़मीन की नापी (Measurement) करने की ज़रूरत है। ऐसे बड़े और जटिल मामलों के लिए सरकार ने 75 दिन का समय फिक्स किया है।

ध्यान दें कि अगर अंचल अधिकारी (CO) इस समय सीमा में काम नहीं करते हैं, तो उन पर विभागीय कार्रवाई हो सकती है। यह आम जनता के लिए बहुत बड़ी जीत है क्योंकि पहले इसी काम में महीनों लग जाते थे।

Required Documents (ज़रूरी कागज़ात और दस्तावेज़)

बिना सही हथियारों के आप कोई जंग नहीं जीत सकते, और ज़मीन का सुधार भी एक जंग ही है। ऑनलाइन आवेदन करने से पहले आपको नीचे दिए गए सभी कागज़ों का एक पीडीएफ (PDF) बना कर अपने कंप्यूटर में रख लेना चाहिए।

  • शपथ पत्र (Affidavit): यह सबसे ज़रूरी दस्तावेज़ है जिसके बिना फॉर्म तुरंत रिजेक्ट हो जाएगा। Parimarjan Plus Website पर इसका फॉर्मेट उपलब्ध है, जिसे भरकर आपको नोटरी से अटेस्ट करवाना होता है।
  • पुरानी लगान रसीद: ज़मीन की सबसे ताज़ा और पुरानी ज़मींदारी समय की रसीद (अगर हो तो) अपने पास रखें। इससे यह साबित होता है कि आप ही इस ज़मीन का लगान (Tax) भरते आ रहे हैं।
  • दाखिल-खारिज (Mutation) शुद्धि पत्र: अगर आपने ज़मीन खरीदी है, तो आपको मिला हुआ शुद्धि पत्र बहुत काम आएगा।
  • खतियान (Khatiyan) की कॉपी: सीएस (CS) या आरएस (RS) खतियान की प्रमाणित कॉपी खाता-खेसरा सुधारने के लिए सबसे बड़ा सबूत मानी जाती है।
  • आईडी प्रूफ: अपना आधार कार्ड, वोटर आईडी या पैन कार्ड स्कैन करके ज़रूर लगाएं।
  • ज़मीन की रजिस्ट्री (Deed): अगर ज़मीन केवाला (Registry) वाली है, तो उस केवाला की साफ़ फोटोकॉपी लगानी होगी।
Affidavit for Parimarjan Portal Bihar

Step-by-Step Online/Offline Process (आवेदन का पूरा तरीका – Step-by-Step)

मैं आपको वो पूरा असली तरीका बता रहा हूँ जो एक सरकारी ऑपरेटर इस्तेमाल करता है। किसी भी साइबर कैफे वाले को फालतू पैसे देने से बचें और खुद इस प्रक्रिया को समझें।

स्टेप 1: आधिकारिक पोर्टल पर जाएं

सबसे पहले अपने मोबाइल या लैपटॉप में सरकार की वेबसाइट biharbhumi.bihar.gov.in खोलें। होम पेज पर ही आपको एक बड़ा सा ‘परिमार्जन प्लस’ (Parimarjan Plus) का बटन दिखाई देगा, उस पर क्लिक करें।

स्टेप 2: नया रजिस्ट्रेशन और लॉगिन

अगर आप पहली बार साइट पर आए हैं, तो आपको ‘New Registration’ पर क्लिक करके अपना नाम और मोबाइल नंबर डालना होगा। इसके बाद मोबाइल पर आए ओटीपी (OTP) से लॉगिन कर लें।

स्टेप 3: आवेदन का प्रकार चुनें

लॉगिन करने के बाद “Rectification in Old Jamabandi” (पुरानी जमाबंदी में सुधार) वाले विकल्प को सेलेक्ट करें। अब आपको अपनी ज़मीन का ज़िला, अंचल (Block) और मौजा (Village) चुनना होगा।

स्टेप 4: अपनी जमाबंदी को खोजें

अपनी ज़मीन का खाता नंबर, खेसरा नंबर या रैयत का नाम डालकर अपनी जमाबंदी को Search करें। जब आपकी डिटेल स्क्रीन पर आ जाए, तो उसके ठीक सामने बने एक तीर (→) वाले बटन पर क्लिक करें।

स्टेप 5: सुधार का अनुरोध (Change Request) डालें

अब आपके सामने पूरी जमाबंदी खुल जाएगी और हर जानकारी के सामने “परिवर्तन अनुरोध” (Change Request) का विकल्प होगा। आपको जिस भी चीज़ में सुधार करना है (जैसे नाम या रकबा), उसे ‘YES’ कर दें और नीचे सही जानकारी टाइप करें।

स्टेप 6: पीडीएफ कागज़ात अपलोड करें

सही जानकारी भरने के बाद आपको पहले से बनाए गए अपने सभी सबूतों का पीडीएफ फाइल अपलोड करना होगा। इसी जगह पर आपको अपना प्रमाणित शपथ पत्र (Affidavit) भी अपलोड करना है।

स्टेप 7: फाइनल सबमिट और पावती (Receipt)

सारी डिटेल्स एक बार दोबारा चेक करें और ‘Final Submit’ के बटन पर क्लिक कर दें। आपको एक पावती संख्या (Acknowledgement Number) मिल जाएगी, जिसे प्रिंट करके अपने पास सुरक्षित रख लें।

स्टेप 8: हल्का कर्मचारी का वेरिफिकेशन (Karmchari Verification)

ऑनलाइन फॉर्म भरने के बाद अपने सभी कागज़ों की हार्ड कॉपी लेकर एक बार अपने हल्का कर्मचारी (Revenue Karmchari) से ज़रूर मिलें। वह आपके दस्तावेज़ों का मिलान पुराने रजिस्टर-2 से करके अपनी पॉज़िटिव रिपोर्ट अंचल निरीक्षक (CI) को भेज देगा।

स्टेप 9: अंचल अधिकारी (CO) का अंतिम आदेश

सीआई (CI) की चेकिंग के बाद फाइल फाइनल अप्रूवल के लिए सीओ (Circle Officer) के डेस्क पर जाती है। सीओ के डिजिटल साइन (Digital Signature) करते ही आपका रिकॉर्ड ऑनलाइन सही हो जाता है।

Fraud Prevention & Precautions (धोखाधड़ी से कैसे बचें और सावधानियां)

ज़मीन के मामलों में जालसाज़ों की कोई कमी नहीं है, इसलिए एक पटवारी के तौर पर मैं आपको कुछ सख्त हिदायतें दे रहा हूँ।

  • दलालों से सावधान रहें: अंचल ऑफिस के बाहर घूमने वाले दलाल आपको “एक दिन में काम कराने” का लालच देंगे। ऐसे लोगों को भूलकर भी अपने ओरिजिनल कागज़ात (Deed/Khatiyan) न दें।
  • ओटीपी (OTP) फ्रॉड: परिमार्जन पोर्टल पर कोई भी अधिकारी आपको फोन करके ओटीपी नहीं मांगता है। अगर कोई खुद को कर्मचारी बताकर ओटीपी मांगे, तो तुरंत कॉल काट दें।
  • फर्जी वेबसाइट से बचें: हमेशा ध्यान रखें कि सरकारी वेबसाइट के अंत में ‘.gov.in’ ज़रूर लगा हो। गूगल पर सर्च करते समय किसी भी प्राइवेट (‘.com’ या ‘.in’) वाली मिलती-जुलती वेबसाइट पर अपनी ज़मीन की जानकारी न डालें।
  • शपथ पत्र में झूठ न बोलें: अपने एफिडेविट में कोई भी झूठी बात या फर्जी वंशावली न लगाएं। पकड़े जाने पर न सिर्फ आपका फॉर्म रिजेक्ट होगा, बल्कि आप पर 420 (धोखाधड़ी) का क्रिमिनल केस भी दर्ज हो सकता है।

Common Rejections & Solutions (फॉर्म रिजेक्ट होने के 3 बड़े कारण और उनके उपाय)

अंचल अधिकारी (CO) को रोज़ाना सैकड़ों फॉर्म मिलते हैं, और वो छोटी सी गलती पर फॉर्म रिजेक्ट कर देते हैं। आइए जानते हैं कि सबसे ज़्यादा फॉर्म किन वजहों से रिजेक्ट होते हैं और उनका पक्का उपाय क्या है।

  • पहला कारण – शपथ पत्र का न होना: बहुत से लोग बिना एफिडेविट के ही फॉर्म सबमिट कर देते हैं, जो रिजेक्शन का सबसे बड़ा कारण है।
    • उपाय: पोर्टल से शपथ पत्र का फॉर्मेट डाउनलोड करें, उस पर कोर्ट फीस का टिकट लगाएं और नोटरी से साइन करवाकर ही अपलोड करें।
  • दूसरा कारण – अस्पष्ट (Blurry) कागज़ात अपलोड करना: लोग मोबाइल से गंदी फोटो खींचकर पीडीएफ बना लेते हैं, जिसे कर्मचारी पढ़ ही नहीं पाता।
    • उपाय: हमेशा एक अच्छे स्कैनर मशीन या मोबाइल की अच्छी स्कैनर ऐप से अपने दस्तावेज़ स्कैन करें ताकि हर एक अक्षर मोतियों जैसा साफ दिखे।
  • तीसरा कारण – वंशावली (Succession) का मैच न होना: अगर दादाजी के नाम ज़मीन थी और पोता सुधार के लिए अप्लाई कर रहा है, तो बीच की कड़ी गायब होने से फॉर्म रद्द हो जाता है।
    • उपाय: आपको सरपंच या बीडीओ (BDO) से बनवाई गई एक पुख्ता वंशावली (Family Tree) अपने फॉर्म के साथ लगानी चाहिए।

Patwari/Advocate’s Secret Tips (पटवारी और वकील के सीक्रेट टिप्स)

अब मैं आपको कुछ ऐसे कानूनी “जुगाड़” और सीक्रेट टिप्स बता रहा हूँ जो आपको जल्दी कोई नहीं बताएगा। ये टिप्स आपके सालों के अटके काम को हफ्तों में पूरा करवा सकते हैं।

  • कर्मचारी को पहले ही कॉन्फिडेंस में लें: ऑनलाइन अप्लाई करने से पहले अपने हलके के पटवारी (कर्मचारी) को अपने कागज़ एक बार ऑफलाइन दिखा लें। अगर वह पहले ही कह दे कि “कागज़ सही हैं”, तो ऑनलाइन अप्लाई करने के बाद वह आपकी फाइल तुरंत आगे बढ़ा देगा।
  • पुराने रजिस्टर-2 की जांच खुद करें: कभी-कभी सरकारी रजिस्टर के पन्ने फटे होते हैं या स्याही मिट गई होती है। ऐसे में आरटीआई (RTI) लगाकर पहले पुराने रजिस्टर की सर्टिफाइड कॉपी निकलवा लें, इससे आपका केस बेहद मज़बूत हो जाएगा।
  • डीसीएलआर (DCLR) कोर्ट का ब्रह्मास्त्र: अगर अंचल अधिकारी (CO) बिना किसी सही कारण के आपका परिमार्जन आवेदन बार-बार रिजेक्ट कर रहा है। तो आप उन सभी रिजेक्टेड फॉर्म की कॉपी लेकर अनुमंडल स्तर पर DCLR (भूमि सुधार उप समाहर्ता) के कोर्ट में अपील कर सकते हैं।
  • दस्तावेज़ों का सही क्रम (Order of Documents): पीडीएफ फाइल बनाते समय सबसे पहले अपना आधार कार्ड रखें, फिर शपथ पत्र, फिर रजिस्ट्री की कॉपी और अंत में लगान रसीद लगाएं। फाइल सजी हुई होती है तो बाबू लोगों को चेक करने में आसानी होती है और काम जल्दी होता है।
  • शपथ पत्र में पूरी कहानी लिखें: एफिडेविट में सिर्फ यह न लिखें कि “मेरा नाम ठीक कर दें”। उसमें पूरी बात बताएं कि ज़मीन कैसे खरीदी गई, पुराना नाम क्या था और गलती किस साल में हुई।

Top 3 FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले 3 महत्वपूर्ण सवाल)

1. सवाल: क्या मैं किसी भी राज्य से बिहार की ज़मीन के परिमार्जन के लिए अप्लाई कर सकता हूँ?

जवाब: जी हाँ, परिमार्जन प्लस पूरी तरह से ऑनलाइन पोर्टल है। आप दिल्ली, मुंबई या दुनिया के किसी भी कोने में बैठकर अपने मोबाइल या लैपटॉप से आवेदन कर सकते हैं।

2. सवाल: परिमार्जन प्लस पर मेरा फॉर्म CO ने रिजेक्ट कर दिया है, अब मुझे क्या करना चाहिए?

जवाब: पोर्टल पर अपने स्टेटस में चेक करें कि CO ने रिजेक्शन का क्या कारण (Comment) लिखा है। उस कमी को पूरा करके आप दोबारा से एक नया फ्रेश आवेदन (Re-apply) कर सकते हैं।

3. सवाल: अगर ज़मीन का कोई पुराना रिकॉर्ड या केवाला मेरे पास नहीं है तो क्या करें?

जवाब: ऐसी स्थिति में आपको ज़िला निबंधन कार्यालय (Registry Office) से पुराने केवाला की सर्टिफाइड कॉपी (सर्टिफाइड नकल) निकलवानी पड़ेगी। इसके बिना ज़मीन के रकबे या खाते में कोई भी बड़ा सुधार करना लगभग नामुमकिन होता है।

आखिरी बात

ज़मीन इंसान की सबसे बड़ी पूंजी होती है और इसके कागज़ात दुरुस्त रखना आपका सबसे पहला फर्ज़ है। परिमार्जन प्लस (Parimarjan Plus) पोर्टल ने अब इस काम को बहुत पारदर्शी और आसान बना दिया है।

अगर आप सही कागज़ात और सही प्रक्रिया के साथ आवेदन करते हैं, तो आपका काम तय समय सीमा के भीतर ज़रूर पूरा होगा। बस दलालों से दूर रहें और अपने कानूनी अधिकारों के प्रति पूरी तरह से जागरूक रहें।

ज़मीन और प्रॉपर्टी से जुड़ी ऐसी ही अन्य महत्वपूर्ण जानकारी के लिए Sarkari Resultine पर विज़िट करें। आशा है कि इस जानकारी से आपके ज़मीन से जुड़े कई उलझे हुए मामले सुलझ जाएंगे, धन्यवाद!

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